मुरैना। मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में रविवार सुबह एक दर्दनाक रेल हादसे में मां-बेटे समेत चार यात्रियों की जान चली गई। बताया जा रहा है कि ट्रेन में मोबाइल ब्लास्ट और आग लगने की अफवाह फैलने के बाद यात्री घबराकर नीचे उतर गए। इसी दौरान वे दूसरी पटरी पर पहुंच गए और तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आ गए।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार हादसा उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल के हेतमपुर-धौलपुर रेलखंड पर हुआ। गाड़ी संख्या 19665 खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस रविवार सुबह करीब 4:15 बजे अलार्म चेन पुलिंग के कारण बीच सेक्शन में रुक गई थी। इसी दौरान एक कोच में मोबाइल ब्लास्ट जैसी अफवाह फैल गई, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई।
अफवाह से दहशत, ट्रेन से कूदे यात्री
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ट्रेन रुकते ही कई यात्री बिना स्थिति समझे नीचे उतर गए। कुछ लोग घबराहट में रेलवे ट्रैक की ओर भागने लगे। इसी दौरान दूसरी लाइन पर गाड़ी संख्या 20424 फिरोजपुर-सिवनी पातालकोट एक्सप्रेस तेज गति से गुजर रही थी। ट्रैक पर मौजूद चार यात्री पातालकोट एक्सप्रेस की चपेट में आ गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
मृतकों में मां-बेटा भी शामिल
हादसे में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के चार यात्रियों की जान गई। मृतकों की पहचान मेरठ निवासी कंचन सिंह (25), रुनकता निवासी शकुंतला सिंह (60), आगरा निवासी आफरीन (35) और उनके चार वर्षीय पुत्र असद के रूप में हुई है। आफरीन और असद मां-बेटे थे।
बागेश्वर धाम से लौट रहे थे यात्री
यात्री पूजा ने बताया कि कोच में मोबाइल ब्लास्ट की सूचना फैलते ही लोगों में डर का माहौल बन गया। चेन पुलिंग के बाद ट्रेन रुकते ही यात्री जल्दबाजी में नीचे उतर गए और सुरक्षित स्थान तलाशने के लिए ट्रैक की ओर दौड़ पड़े। इसी अफरा-तफरी ने बड़ा हादसा जन्म दे दिया।
मौके पर पहुंची रेलवे और प्रशासनिक टीमें
घटना की सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF), जीआरपी और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया और स्थिति को नियंत्रित किया गया।
मुरैना पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीणा ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीमों को तत्काल घटनास्थल पर भेजा गया। यह हादसा मुरैना और धौलपुर की सीमा के निकट हुआ। सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। मामले की जांच जारी है।
अफवाहों से सावधान रहने की जरूरत
यह हादसा एक बार फिर साबित करता है कि बिना पुष्टि की गई अफवाहें कितनी घातक साबित हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रेन या किसी भी सार्वजनिक स्थान पर आपात स्थिति में घबराने के बजाय रेलवे कर्मियों और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन करना चाहिए।

