आवारा कुत्तों की शिकार 5 वर्षीय मासूम ने उपचार के दौरान तोड़ा दम, प्रशासन पर उठ रहे कई सवाल

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ठाणे। शहर के दिवा-आगसन रोड क्षेत्र में एक 5 वर्षीय मासूम को कुत्ते ने हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया, जिसका उपचार के बाद उसकी दुर्भाग्यवस मौत हो गई। यह घटना प्रशासन सहित कई जिम्मेदारों को कटघरे में खड़ा करती है। उल्लेखनीय है कि कुछ महीनों पहले सुपीकोर्ट द्वारा आवारा पशुओं खास तौर पर कुत्तों की सार्वजनिक क्षेत्रों से हटाने को लेकर कठोर कदम उठाते हुए सरकारों को निर्देशित किया था। लेकिन एससी के आदेशों के बावजूद यदि आवारा कुत्तों द्वारा मासूमों को अपना शिकार बनाया जा तो इसे कोर्ट के आदेशों की अवमानना ही कहा जाएगा।
17 नवंबर को बच्ची जब बाहर खेल रही थी, तभी एक आवारा कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया। इसके बाद उसे तुरंत डोंबिवली के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। बताया गया कि वहां उसका इलाज शुरू किया गया और जरूरी इंजेक्शन लगाए गए। अगले कुछ हफ्तों तक उसका इलाज चलता रहेगा। 3 दिसंबर को उनका जन्मदिन मनाया गया, जब उनके परिवार को बताया गया कि उनकी हालत स्थिर है।
हालांकि, 16 दिसंबर को चौथे इंजेक्शन के बाद उनकी हालत अचानक बिगड़ गई और डॉक्टरों ने बताया कि उनमें रेबीज के लक्षण दिखने लगे हैं। स्थिति गंभीर होने पर उन्हें मुंबई के कस्तूरबा अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन वहां पहुंचने पर उनकी हालत बेहद नाजुक बताई गई और इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। एडवोकेट रोहिदास मुंडे ने कहा कि लंबे समय तक इलाज के बाद रेबीज के लक्षणों का दिखना गंभीर है और इलाज के तरीके, दवाओं की गुणवत्ता, चिकित्सकीय निगरानी और रेफरल प्रक्रिया के संबंध में निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मामले में किसी सक्षम तंत्र के माध्यम से जांच की जाए ताकि यह पता चल सके कि इसमें कोई चिकित्सा या प्रशासनिक त्रुटि तो नहीं थी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए।
दिवा शहर में आवारा कुत्तों का मुद्दा लंबे समय से लंबित है और जन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को इस संबंध में निवारक उपायों को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता है। इस घटना से नागरिकों में चिंता बढ़ गई है और उम्मीद है कि मामले की गहन जांच के बाद भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उचित उपाय किए जाएंगे।