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इजराइल-ईरान युद्ध पर चुप क्यों हैं PM……भारतीय हितों का किया समझौता’ : सिसोदिया

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी ने अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने कहा कि मौजूदा हालात में प्रधानमंत्री की चुप्पी चिंताजनक है। उनका आरोप है कि जब दुनिया एक बड़े भू-राजनीतिक संकट से गुजर रही है, तब भारत की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया न आना देश की कूटनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकता है।

सिसोदिया ने कहा कि हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील के बाद भारत ने रूस से तेल आयात को सीमित करने का फैसला लिया था। उनके मुताबिक भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए किसी बड़े सप्लायर को अचानक छोड़ना सिर्फ कूटनीतिक निर्णय नहीं बल्कि ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा अहम मुद्दा होता है। इससे देश में तेल की उपलब्धता, कीमतों की स्थिरता और संकट के समय विकल्पों पर भी असर पड़ सकता है।

आप नेता का कहना है कि इस समझौते के कुछ ही हफ्तों बाद अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष शुरू हो गया, जबकि अमेरिकी प्रशासन खुद कह रहा है कि युद्ध की तैयारी लंबे समय से चल रही थी। ऐसे में सवाल उठता है कि जब संभावित संकट की जानकारी पहले से थी, तो भारत को रूस से तेल आयात कम करने के लिए क्यों राजी किया गया। सिसोदिया ने पूछा कि क्या भारत को इस मामले में पूरी जानकारी दी गई थी या फिर रणनीतिक स्तर पर कोई चूक हुई।

उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बावजूद भारत की ओर से स्पष्ट बयान न आना चिंता का विषय है। सिसोदिया के अनुसार अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का असर सीधे भारत की ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता पर पड़ सकता है, इसलिए सरकार को स्थिति पर खुलकर अपनी नीति और रणनीति स्पष्ट करनी चाहिए। उनका कहना है कि ऐसे समय में पारदर्शिता और मजबूत कूटनीतिक रुख देश के हित में होता है।

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