ग्लोबल वार्मिंग की मार सबसे ज्यादा किसानों पर
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आधुनिक शहरों की चुनौतियों का समाधान हमारे प्राचीन ज्ञान में निहित है। गर्मी से बचाव के लिए पुराने समय में अपनाई गई तकनीकें आज भी प्रासंगिक हैं और कम खर्च में बेहतर परिणाम देती हैं। वे शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित ‘ग्रीन बिल्डिंग तकनीक’ विषयक राष्ट्रीय सेमीनार को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उनकी उपस्थिति में लोक निर्माण विभाग, आईआईटी इंदौर और गृहा संस्था के बीच एमओयू का आदान-प्रदान हुआ। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य संसाधनों का प्रभावी उपयोग कर नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि भले ही जीपीएस आधुनिक तकनीक है, लेकिन समय और दिशा निर्धारण की भारतीय परंपरा सदियों पुरानी है। महाकाल क्षेत्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि पूर्व का निर्धारित बिंदु अब लगभग 32 किलोमीटर दूर खिसक चुका है, जहां वर्तमान में ऑब्जर्वेटरी स्थापित है।
उन्होंने मांडव का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणाली को पुनर्जीवित किया जा सकता है। जिस प्रकार भोपाल में राजा भोज ने जल प्रबंधन का उत्कृष्ट मॉडल विकसित किया था, उसी तरह मांडव को भी स्थापत्य और जल प्रबंधन का आदर्श केंद्र बनाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने ग्लोबल वार्मिंग को गंभीर चिंता बताते हुए कहा कि इसके कारण आंधी-तूफान और मौसम की अनिश्चितता बढ़ रही है, जिसका सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है। उन्होंने आम की फसल का उदाहरण देते हुए कहा कि आंधी में फल झड़ने से किसान की सालभर की मेहनत एक झटके में खत्म हो जाती है—इस पीड़ा को समझना जरूरी है।
गांवों में एसी की बढ़ती मांग से ऊर्जा संकट की आशंका
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में घरों और कार्यालयों में एयर कंडीशनर की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे ऊर्जा खपत लगातार बढ़ रही है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में भी एसी का उपयोग बढ़ा, तो भविष्य में ऊर्जा संकट गहरा सकता है।
उन्होंने कहा कि इस चुनौती का समाधान ग्रीन बिल्डिंग की अवधारणा में ही निहित है। इसी उद्देश्य से इस सेमीनार का आयोजन किया गया है, जिसमें ग्रीन बिल्डिंग के लिए आवश्यक सामग्री, वेस्ट मैनेजमेंट, ऊर्जा दक्षता, प्राकृतिक प्रकाश और वेंटिलेशन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है। साथ ही स्मार्ट टेक्नोलॉजी और 3डी प्रिंटिंग आधारित भवन निर्माण पर भी विचार-विमर्श हो रहा है, जो भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
ग्राउंड वाटर रिचार्ज पर विशेष जोर
मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि विभाग ग्राउंड वाटर रिचार्ज के लिए रिचार्ज बोर्ड के माध्यम से सक्रिय रूप से काम कर रहा है। साथ ही सभी एलिवेटेड कॉरिडोर और फ्लाईओवर पर रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से लागू किया गया है।
उन्होंने कहा कि अब इंजीनियर जनसंख्या, भूमि और दूरी के वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर भविष्य की योजनाएं तैयार कर रहे हैं, जिससे आने वाले समय की जरूरतों को प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सके। इन योजनाओं की जानकारी आम जनता को भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि निर्माण और विकास कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

