कोलकाता। पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल भवानीपुर विधानसभा सीट पर इस बार सियासी भूचाल देखने को मिला। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी ने 15 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया। यह नतीजा राज्य की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत दे रहा है।
कड़ी टक्कर के बाद बदला खेल
बता दें मतगणना के दौरान कई राउंड तक मुकाबला बेहद कांटे का रहा। शुरुआती रुझानों में दोनों नेताओं के बीच मामूली अंतर बना रहा, लेकिन जैसे-जैसे राउंड आगे बढ़े, सुवेंदु अधिकारी ने बढ़त को मजबूत कर लिया। सभी 20 राउंड पूरे होने के बाद तस्वीर साफ हो गई। जिसमें सुवेंदु अधिकारी को 73,463 वोट मिले, जबकि ममता बनर्जी 58,349 वोटों पर सिमट गईं। कुल अंतर 15,105 वोटों का रहा, जो एक स्पष्ट जनादेश को दर्शाता है।
काउंटिंग सेंटर के बाहर हलचल
काउंटिंग के दौरान भवानीपुर में माहौल पूरी तरह गर्म रहा। ममता बनर्जी के काउंटिंग सेंटर पहुंचने पर बाहर तनाव की स्थिति भी बनी। इस दौरान उन्होंने बीजेपी और चुनाव आयोग पर मिलीभगत के आरोप लगाए, जिससे राजनीतिक माहौल और तीखा हो गया।
दो चुनाव, दो हार
जानकारी के मुताबिक, यह हार सिर्फ एक सीट का नुकसान नहीं, बल्कि लगातार दूसरी बार सुवेंदु अधिकारी के हाथों मिली पराजय है। इससे पहले 2021 में नंदीग्राम विधानसभा सीट पर भी ममता बनर्जी को हार का सामना करना पड़ा था। उस समय उन्होंने भवानीपुर से उपचुनाव जीतकर विधानसभा में वापसी की थी, लेकिन इस बार कहानी अलग रही।
सियासी रिश्ते से सियासी मुकाबला
सूत्रों अनुसार, कभी ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी रहे सुवेंदु अधिकारी अब उनके सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बन चुके हैं। नंदीग्राम आंदोलन से लेकर सिंगूर तक, दोनों नेताओं ने साथ काम किया, लेकिन बाद में रास्ते अलग हो गए और सुवेंदु बीजेपी में शामिल हो गए। अब वही राजनीतिक दूरी सीधे चुनावी मुकाबले में बदल चुकी है।
टीएमसी का गढ़ कैसे टूटा?
भवानीपुर सीट को लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। 2011 के बाद से यहां टीएमसी का लगातार दबदबा रहा, लेकिन 2026 के चुनाव में यह किला ढह गया। इससे पहले इस सीट पर कांग्रेस और वाम दलों का भी प्रभाव रहा है, जो इसे ऐतिहासिक रूप से अहम बनाता है।
इस नतीजे ने साफ कर दिया है कि बंगाल की राजनीति अब तेजी से बदल रही है। परंपरागत गढ़ कमजोर हो रहे हैं और नए राजनीतिक समीकरण उभर रहे हैं। भवानीपुर का यह परिणाम आने वाले समय में राज्य की सियासत की दिशा तय कर सकता है।

