अटलांटिक महासागर। बीच एक लग्जरी क्रूज शिप पर डर, अनिश्चितता और बीमारी का साया छा गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की निगरानी में चल रहे इस मामले में ‘हंता वायरस’ के प्रकोप ने अब तक 3 लोगों की जान ले ली है, जबकि 150 से ज्यादा यात्री जहाज पर ही क्वारंटीन हैं। किसी को भी फिलहाल किनारे उतरने की अनुमति नहीं दी गई है।
सफर बना संकट
एमवी होंडियस नाम का यह पोलर क्रूज, जिसे Oceanwide Expeditions संचालित करता है, 20 मार्च को अर्जेंटीना के उशुआइया से रवाना हुआ था। यह सफर रोमांच और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार यह यात्रा हेल्थ इमरजेंसी में बदल गई। जहाज पर 150+ यात्री और 60 से ज्यादा क्रू मेंबर्स मौजूद हैं, जिनमें कई देशों के लोग शामिल हैं।
संक्रमण कैसे फैला?
अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वायरस जहाज पर कैसे पहुंचा। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि कुछ यात्रियों में गंभीर लक्षण दिखने के बाद टेस्टिंग शुरू हुई। एक केस लैब में कन्फर्म हुआ है, जबकि कई संदिग्ध मामले सामने आए हैं। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि संक्रमण संभवत जहाज पर मौजूद किसी संक्रमित सतह या पहले से संक्रमित व्यक्ति के जरिए फैला हो सकता है।
WHO की निगरानी और इमरजेंसी रिस्पॉन्स
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बयान जारी कर कहा है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर मेडिकल सपोर्ट दिया जा रहा है। एक गंभीर मरीज को साउथ अफ्रीका में ICU में भर्ती कराया गया है।
जहाज से आई भावुक अपील
जेक रोसमारिन बोस्टन के रहने वाले ट्रैवल ब्लॉगर हैं और इंस्टाग्राम पर उनके 44,000 से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। उन्होंने इस डच झंडे वाले जहाज से एक भावुक वीडियो पोस्ट किया है। वीडियो में उन्होंने कहा ‘मैं आम तौर पर इस तरह वीडियो नहीं बनाता, लेकिन मुझे लगता है कि मुझे कुछ कहना चाहिए। इसलिए मैंने कुछ बातें लिखी हैं। मैं अभी जहाज पर हूं और यहां जो हो रहा है, वह हमारे लिए बहुत असली है। हम सिर्फ एक खबर नहीं हैं. हम सिर्फ हेडलाइन नहीं हैं. हम लोग हैं, जिनके परिवार हैं, जिनके घर पर लोग हमारा इंतजार कर रहे हैं. यहां बहुत अनिश्चितता है, और यही सबसे मुश्किल चीज है. हम बस सुरक्षित महसूस करना चाहते हैं, साफ जानकारी चाहते हैं और घर वापस जाना चाहते हैं।’
क्या है हंता वायरस?
हंता वायरस एक दुर्लभ लेकिन खतरनाक वायरस ग्रुप है, जो मुख्य रूप से चूहों (रोडेन्ट्स) के जरिए फैलता है। इंसानों में यह संक्रमण तब होता है जब वे संक्रमित जानवरों के पेशाब, मल या लार के संपर्क में आते हैं।
फैलने का तरीका–
- दूषित सतह को छूना
- संक्रमित कणों का सांस के जरिए शरीर में जाना
- बंद जगहों में सफाई के दौरान जोखिम ज्यादा
लक्षण–
- शुरुआती: बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द
- एडवांस स्टेज: सांस लेने में दिक्कत, लो ब्लड प्रेशर
- गंभीर मामलों में फेफड़ों पर असर (HPS सिंड्रोम)
विशेषज्ञों के अनुसार, क्रूज शिप जैसे बंद और सीमित स्पेस में संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। जहाज पर वेंटिलेशन सिस्टम, साझा जगहें और सीमित मेडिकल सुविधा स्थिति को और जटिल बना देती हैं। यही कारण है कि प्रशासन किसी भी जोखिम से बचने के लिए यात्रियों को तुरंत डिबार्क (उतारने) की अनुमति नहीं दे रहा।
फिलहाल जहाज को मेडिकल क्लियरेंस मिलने तक समुद्र में ही रोका जा सकता है। सभी यात्रियों की हेल्थ मॉनिटरिंग की जा रही है और अतिरिक्त टेस्टिंग की तैयारी है।
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि ग्लोबल ट्रैवल के इस दौर में हेल्थ सिक्योरिटी कितनी अहम हो गई है, जहां एक छोटा संक्रमण भी अंतरराष्ट्रीय संकट बन सकता है।

