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ट्विशा शर्मा केस: भोपाल सेंट्रल जेल में ‘VIP ट्रीटमेंट’ विवाद पर बड़ा खुलासा

भोपाल। चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में न्यायिक हिरासत में बंद पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को लेकर भोपाल सेंट्रल जेल में VIP ट्रीटमेंट दिए जाने के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। हालांकि जेल मुख्यालय ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि दोनों आरोपियों को किसी प्रकार की विशेष सुविधा नहीं दी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि पूर्व जज को अलग बैरक में रखने का फैसला केवल सुरक्षा कारणों और कोर्ट के निर्देशों के तहत लिया गया है।

कोई विशेष व्यवस्था नहीं

जेल सूत्रों के अनुसार, गिरिबाला सिंह के बेटे और पेशे से वकील समर्थ सिंह को बैरक नंबर-4 में रखा गया है, जहां उनके साथ अन्य विचाराधीन बंदियों जैसा ही व्यवहार किया जा रहा है। जेल प्रशासन का कहना है कि मुलाकात, भोजन और अन्य सुविधाओं के लिए कोई अलग व्यवस्था नहीं बनाई गई है। सभी नियम जेल मैनुअल के अनुसार लागू हैं।

आखिर क्यों बढ़ानी पड़ी सुरक्षा?

इस मामले का सबसे अहम पहलू सुरक्षा से जुड़ा है। जेल अधिकारियों के मुताबिक, गिरिबाला सिंह अपने न्यायिक कार्यकाल के दौरान जिन 29 आरोपियों को सजा सुना चुकी हैं, उनमें से कई वर्तमान में इसी जेल में बंद हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। गिरिबाला सिंह को महिला विंग के बैरक नंबर-8 में रखा गया है, जो बुजुर्ग और विशेष निगरानी वाली महिला बंदियों के लिए निर्धारित है। बैरक के आसपास अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं और CCTV निगरानी भी बढ़ाई गई है, ताकि किसी अप्रिय घटना की आशंका को रोका जा सके।

सुविधा नहीं सुरक्षा प्राथमिकता

मामले को लेकर जेल प्रशासन का कहना है कि पूर्व जज को अलग रखने का उद्देश्य किसी प्रकार का आराम या विशेष सुविधा देना नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। कोर्ट ने भी उन्हें सुरक्षित वातावरण में रखने के निर्देश दिए हैं, जिसके चलते प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए हैं।

जेल प्रशासन में फेरबदल पर भी उठे सवाल

वहीं VIP ट्रीटमेंट के आरोपों के बीच जेल प्रशासन में कुछ जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण भी किया गया है। महिला सेक्शन का प्रभार अब प्रियंका को सौंपा गया है, जबकि पूर्व वार्ड प्रभारी जया यादव को वारंट सेक्शन में स्थानांतरित किया गया है। हालांकि जेल मुख्यालय ने इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बताया है और किसी जांच से जोड़ने से इनकार किया है।

जेल अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कैंटीन, भोजन, मुलाकात और अन्य सुविधाओं को लेकर सभी कैदियों पर समान नियम लागू हैं। गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को भी वही सुविधाएं मिल रही हैं जो अन्य बंदियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत उपलब्ध कराई जाती हैं।

CBI जांच वाले इस हाई-प्रोफाइल मामले में हर नई जानकारी पर लोगों की नजर बनी हुई है। फिलहाल जेल प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा और कानून के दायरे में रहकर सभी व्यवस्थाएं संचालित की जा रही हैं और किसी भी आरोपी को विशेष दर्जा नहीं दिया गया है।

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