नई दिल्ली/अयोध्या। अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दानराशि के कथित दुरुपयोग से जुड़ा मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत के दरवाजे तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजी गई एक पत्र याचिका में पूरे मामले की स्वतंत्र और न्यायिक निगरानी में जांच कराने की मांग की गई है।
याचिका में कहा गया है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। साथ ही आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए प्राथमिकी दर्ज करने और कोर्ट मॉनिटरिंग में जांच एजेंसी गठित करने की अपील की गई है।
राजनीतिक बयानबाजी से बढ़ी चर्चा
बता दें दानराशि प्रबंधन को लेकर लगाए गए आरोपों के बाद प्रदेश की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग उठाई है, जबकि मंदिर ट्रस्ट ने आरोपों की सत्यता स्पष्ट करने और तथ्यों को सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच का समर्थन किया है।
राज्य सरकार ने बनाई तीन सदस्यीय एसआईटी
सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। जांच टीम में वरिष्ठ प्रशासनिक, पुलिस और वित्तीय अधिकारियों को शामिल किया गया है, जो सभी पहलुओं की समीक्षा करेंगे। एसआईटी टीम अयोध्या पहुंच चुकी है और दस्तावेजों एवं वित्तीय रिकॉर्ड की जांच प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
ट्रस्ट और नेताओं की प्रतिक्रिया
वहीं राम मंदिर आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ नेताओं ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। साथ ही मामले पर विपक्ष का कहना है कि जांच पूरी होने तक संबंधित मामलों की निष्पक्ष निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
अब सभी की नजरें एसआईटी जांच और सुप्रीम कोर्ट की संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं, जो आगे की दिशा तय कर सकती है।

