भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र को मात्र 5 दिनों तक सीमित किए जाने पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि जब सरकार के पास जनता के सवालों के जवाब नहीं होते, तब विधानसभा सत्रों की अवधि कम कर दी जाती है।
सिंघार ने कहा कि यह केवल विधानसभा की कार्यवाही कम करने का मामला नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक जवाबदेही को सीमित करने की कोशिश है। प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों से चुने गए विधायक 7 करोड़ से अधिक जनता की आवाज़ का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में किसानों की बदहाली, युवाओं की बेरोजगारी, महिलाओं की सुरक्षा, आदिवासी अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बढ़ता कर्ज, भ्रष्टाचार और बिगड़ती कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों पर सार्थक चर्चा के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रदेश के इतने महत्वपूर्ण विषयों को केवल 5 बैठकों में समेटा जा सकता है? क्या प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण, शून्यकाल और जनहित के मुद्दों पर प्रभावी चर्चा इतनी सीमित अवधि में संभव है?
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच है और जितनी अधिक विधानसभा चलेगी, लोकतंत्र उतना ही मजबूत होगा। सरकार को चर्चा से नहीं, बल्कि जनता के सवालों का जवाब देने के लिए तैयार रहना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस विधायक दल मानसून सत्र के हर मिनट का उपयोग जनता की आवाज़ उठाने और सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए करेगा। सरकार भले ही चर्चा का समय कम कर दे, लेकिन जनता के मुद्दों और सवालों से बच नहीं सकती।

