मुंबई: देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे जारी कर दिए हैं। इस बार कंपनी का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। एक ओर कंपनी की ऑपरेशनल आय (Revenue) 23% बढ़कर ₹1.59 लाख करोड़ तक पहुंच गई, वहीं दूसरी ओर ₹3,962 करोड़ का शुद्ध घाटा दर्ज किया गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को ₹6,124 करोड़ का मुनाफा हुआ था, जबकि पिछली मार्च तिमाही में भी BPCL ने ₹3,191 करोड़ का लाभ कमाया था। यानी बढ़ती बिक्री के बावजूद लागत में भारी उछाल ने कंपनी की कमाई को पूरी तरह प्रभावित कर दिया।
कंपनी के मुताबिक, अमेरिका-ईरान संघर्ष के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं और एक समय 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। इसके अलावा शिपिंग, फ्रेट और इंश्योरेंस की लागत भी बढ़ गई। हालांकि BPCL इन बढ़ी हुई लागतों का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर LPG, पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाकर नहीं डाल सकी, जिससे कंपनी को घाटे का सामना करना पड़ा। तिमाही दर तिमाही आधार पर भी कंपनी का रेवेन्यू ₹1.35 लाख करोड़ से बढ़कर ₹1.59 लाख करोड़ हो गया, लेकिन बढ़ते खर्च ने मुनाफे को नुकसान में बदल दिया।
शेयर पर भी दिखा असर
बता दें तिमाही नतीजों के बाद शेयर बाजार में भी BPCL के शेयर दबाव में रहे। बुधवार को कंपनी का शेयर करीब 3% गिरकर ₹309 पर बंद हुआ। इस साल की शुरुआत से अब तक शेयर में करीब 19% की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि पिछले छह महीनों में यह 12% और एक साल में लगभग 9% कमजोर हुआ है।
निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें किस दिशा में जाती हैं और आने वाली तिमाहियों में कंपनी अपने मुनाफे को कैसे पटरी पर लाती है।
24 जनवरी 1976 को स्थापित BPCL भारत की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों में शामिल है। कंपनी मुंबई, कोच्चि, नुमालीगढ़ और बीना स्थित रिफाइनरियों के जरिए हर साल 40 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक रिफाइनिंग क्षमता रखती है। पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और लुब्रिकेंट्स की सप्लाई करने वाली BPCL का नेतृत्व वर्तमान में चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर जी. कृष्णकुमार कर रहे हैं।

