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हलालपुर पटाखा बाजार: 2 साल पहले दिया अल्टीमेटम, अब तक नहीं हटा बाजार

भोपाल: मध्यप्रदेश में सिस्टम हादसे के बाद ही जागता है। अप्रैल 2024 की डेडलाइन बीत गई, अक्टूबर 2026 आ गया, लेकिन भोपाल कलेक्टर से एक काम नहीं हो पाया। मामला जनहित और सैकड़ों लोगों की जान से जुड़ा है, फिर भी कलेक्टर कार्यालय विधायक के इशारे का इंतजार कर रहा है।

हलालपुर पटाखा बाजार एक बार फिर लिमिट से ज्यादा बारूद से भरा है। रिहायशी इलाके के बीच लगा यह बाजार किसी टाइम बम से कम नहीं, जहां एक चिंगारी पूरे इलाके को तबाह कर सकती है। हैरानी है कि बाजार के ठीक ऊपर से फ्लाइट्स का रूट है, हादसा हुआ तो कलेक्टर की यह लापरवाही सिर्फ भोपाल नहीं, पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनेगी।

फरवरी 2024 में दिया था अल्टीमेटम

हरदा पटाखा फैक्ट्री की दर्दनाक घटना फरवरी 2024 में हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने से पहले भोपाल में 20 से ज्यादा दुकान और गोदाम सील कर दिए गए थे। मीडिया में कलेक्टर का सिंघम स्टाइल बयान छपा था – “45 दिन बाद हलालपुर में बारूद का तिनका भी नहीं मिलेगा।” सभी दुकानदारों को शहर के बाहर शिफ्ट होने का अल्टीमेटम दिया गया था।

लेकिन जैसा अखबारों में छपा, वैसा ऑर्डर कभी जारी ही नहीं हुआ। उल्टा कलेक्टर ऑफिस में पटाखा व्यापारियों के लाइसेंस रिन्यू कर दिए गए।

हलालपुर पुश्तैनी बाजार नहीं

व्यापारी कई तरह की दलीलें देते हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड बताता है कि हलालपुर पटाखा व्यापारियों का पुश्तैनी बाजार नहीं है। 1997 तक यह बाजार भोपाल के कबाड़खाना में लगता था। सिद्धांत के मुताबिक बारूद का व्यापार शहर के बाहर होना चाहिए। कबाड़खाना में आबादी बढ़ी तो बाजार हलालपुर शिफ्ट किया गया। अब हलालपुर में भी आबादी बढ़ गई है। अगर कलेक्टर हलालपुर में लाइसेंस रिन्यू करना बंद कर दे तो समस्या अपने आप खत्म हो जाएगी।

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12 जून को हुआ था धमाका, कलेक्टर ने नहीं सुनी आवाज

इसी साल 12 जून 2026 को हलालपुर में बड़ा धमाका हुआ था। आधी रात को पटाखा दुकान में भीषण आग लग गई। पटाखों के कारण आग ने विकराल रूप ले लिया और लगातार धमाकों से पूरा इलाका दहल उठा। पास में पेट्रोल पंप होने से स्थिति और गंभीर हो गई। कई फायर स्टेशनों की टीम ने 2 घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

किसी की मौत नहीं हुई, इसलिए शायद कलेक्टर ने आवाज नहीं सुनी। भोपाल कलेक्टर की आदत ही ऐसी है – जब तक अस्पताल में घायलों की भीड़ न लगे, यात्राओं में आक्रोश की वीडियो वायरल न हो, या राहुल गांधी मुद्दा न बना दें, तब तक हलालपुर का मामला सॉल्व कैसे होगा?

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