मॉस्को: अफगानिस्तान को लेकर रूस ने एक बार फिर पश्चिमी देशों और NATO पर निशाना साधा है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि अफगानिस्तान और उसके आसपास NATO का सैन्य ढांचा खड़ा करने की किसी भी कोशिश को रूस स्वीकार नहीं करेगा। उनका कहना है कि ऐसी कोशिश पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा बन सकती है।
लावरोव ने अफगान लोगों के संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि अफगानों के जज्बे के सामने एक समय दुनिया की ताकतवर सेनाएं भी अपने मकसद में सफल नहीं हो सकीं।
तालिबान सरकार के कामकाज की तारीफ
मॉस्को में अफगानिस्तान को लेकर आयोजित बैठक में लावरोव ने मौजूदा तालिबान सरकार के कामकाज की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि तालिबान के नेतृत्व वाली सरकार ने देश के ज्यादातर हिस्सों पर अपना नियंत्रण स्थापित किया है और वह शासन चलाने में काफी हद तक सफल रही है।
लावरोव ने कहा कि अफगानिस्तान के सुरक्षा बल ISIS और दूसरे आतंकवादी संगठनों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। कई आतंकवादियों को मारा गया है और कई हमलों को समय रहते रोका भी गया है।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद से लड़ने के लिए अफगानिस्तान की क्षमता बढ़ाना आसपास के देशों के भी हित में है। इसके लिए जरूरी संसाधन, विशेषज्ञ मदद और सुरक्षा एजेंसियों के बीच संपर्क बढ़ाने की जरूरत है।
NATO की सैन्य मौजूदगी का विरोध
लावरोव ने साफ कहा कि रूस अफगानिस्तान या उसके पड़ोसी देशों में किसी भी बहाने NATO के सैन्य ढांचे की वापसी का विरोध करेगा। रूस का मानना है कि विदेशी सैन्य मौजूदगी से क्षेत्र में शांति आने के बजाय तनाव और बढ़ सकता है।
अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सेनाएं करीब दो दशक तक अफगानिस्तान में मौजूद रही थीं। 2021 में विदेशी सेनाओं की वापसी के बाद तालिबान ने एक बार फिर देश की सत्ता अपने हाथ में ले ली थी।
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अफीम उत्पादन में बड़ी कमी का दावा
लावरोव ने अफगानिस्तान में ड्रग्स के खिलाफ हुई कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों का हवाला देते हुए दावा किया कि 2022 के बाद अफीम उत्पादन में करीब 90 प्रतिशत की गिरावट आई है।
उन्होंने अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था को लेकर भी कहा कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद वहां आर्थिक गतिविधियां आगे बढ़ रही हैं। देश में नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू हुई हैं और विदेशी व्यापार भी बढ़ा है।
हालांकि, लावरोव ने यह भी माना कि अफगानिस्तान में मानवीय हालात अभी भी गंभीर हैं। ऐसे में रूस का जोर इस बात पर है कि आतंकवाद और ड्रग्स जैसी समस्याओं से निपटने के साथ अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की स्थिति सुधारने के लिए भी सहयोग बढ़ाया जाए।

