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‘महिला होने के कारण कम न आंकें क्षमता’, हाईकोर्ट ने निचली अदालत की टिप्पणी पर जताई नाराजगी

ग्वालियर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक संपत्ति विवाद की सुनवाई के दौरान महिलाओं की क्षमता को लेकर की गई निचली अदालत की टिप्पणी पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि परिवार के पुरुष सदस्यों के महिला से कानूनी मामलों को संभालने की उम्मीद करने को केवल उसकी उम्र और लिंग के आधार पर अस्वीकार करना लैंगिक पूर्वाग्रह वाली सोच को दर्शाता है।

मामला विदिशा जिले के गंजबासौदा से जुड़ा है। पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी को लेकर 2011 में दीवानी अदालत में मामला दायर किया गया था। ट्रायल कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के दावे को पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने के आधार पर खारिज कर दिया था।

18 दिन की देरी पर खारिज हुई थी अपील

ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ एडीजे कोर्ट में पहली अपील दाखिल की गई, लेकिन इसमें 18 दिन की देरी हुई। याचिकाकर्ता मोहरा बाई ने देरी की वजह अपनी बीमारी बताई और कहा कि वह ही मामले की कानूनी प्रक्रिया देख रही थीं।

एडीजे कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया कि मोहरा बाई की उम्र उस समय 35 वर्ष थी और परिवार में उनसे उम्रदराज पुरुष सदस्य भी मौजूद थे। अदालत ने यह मानना उचित नहीं समझा कि परिवार के बुजुर्ग पुरुष किसी 35 वर्षीय महिला पर कानूनी प्रक्रिया के लिए निर्भर हो सकते हैं। इसी आधार पर अपील खारिज कर दी गई।

हाईकोर्ट ने कहा- अनुमान के आधार पर फैसला नहीं हो सकता

मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो अदालत ने निचली अदालत के इस तर्क पर आपत्ति जताई। 1 अक्टूबर को दिए फैसले में कोर्ट ने कहा कि किसी महिला की क्षमता को केवल इसलिए कम आंकना कि वह परिवार के पुरुष सदस्यों से उम्र में छोटी है, न्यायसंगत नहीं है।

हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई आधार नहीं था, जिसके आधार पर यह अनुमान लगाया जा सके कि मोहरा बाई अपने परिवार की ओर से कानूनी प्रक्रिया नहीं संभाल सकती थीं। अदालत ने इस सोच को लैंगिक पूर्वाग्रह और महिला विरोधी दृष्टिकोण वाला माना।

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हाईकोर्ट ने अपील पर आगे सुनवाई के दिए निर्देश

हाईकोर्ट ने दूसरी अपील को स्वीकार करते हुए मामला निचली अदालत को वापस भेज दिया। कोर्ट ने देरी को माफ करने के आधार पर अपील पर आगे सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मामले से जुड़े सभी पक्षकारों को 15 अक्टूबर को एडीजे कोर्ट, गंजबासौदा में उपस्थित होने के आदेश दिए गए हैं।

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