नई दिल्ली: बैंक से लोन लेने वालों के लिए अहम खबर है। RBI ने करीब चार साल बाद रेपो रेट में बढ़ोतरी की है। रेपो रेट 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दी गई है। इसका असर आने वाले दिनों में होम लोन, कार लोन और दूसरे कर्ज की EMI पर पड़ सकता है।RBI की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी यानी MPC की तीन दिन चली बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार, 7 अक्टूबर को नई ब्याज दरों का ऐलान किया।
बैंक लोन की ब्याज दरों पर पड़ सकता है असर
रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर रिजर्व बैंक बैंकों को कर्ज देता है। रेपो रेट बढ़ने से बैंकों के लिए RBI से पैसा लेना महंगा हो जाता है और इसका असर बैंक लोन की ब्याज दरों पर पड़ सकता है।महंगाई को कंट्रोल में रखने के लिए रिजर्व बैंक ने ये फैसला लिया है।
ब्याज दरों में कटौती का रास्ता पूरी तरह बंद
RBI ने अपने स्टांस को बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है। सरल भाषा में इसका मतलब है कि फिलहाल ब्याज दरों में कटौती का रास्ता पूरी तरह बंद हो चुका है। अगली बैठकों में RBI या तो दरों को स्थिर रखेगा या फिर स्थिति के अनुसार इनमें और बढ़ोतरी करेगा।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के एसवीपी अजीत मिश्रा का कहना है कि 0.25% की बढ़ोतरी उम्मीद के मुताबिक थी, लेकिन पॉलिसी स्टांस में बदलाव अधिक महत्वपूर्ण है। इससे साफ है कि आरबीआई के लिए अब महंगाई को काबू करना सबसे पहली प्राथमिकता है।
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यह बदलाव दर्शाता है
कोटक महिंद्रा बैंक की चीफ इकोनॉमिस्ट उपासना भारद्वाज का मानना है कि आने वाले समय में ब्याज दरों में 0.25 से 0.50% की और बढ़ोतरी हो सकती है, खासकर तब जब ग्लोबल रिस्क बने रहते हैं।
डीबीएस बैंक की सीनियर इकोनॉमिस्ट और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राधिका राव का कहना है कि यह बदलाव दर्शाता है कि आरबीआई महंगाई के जोखिमों को जड़ पकड़ने से रोकना चाहता है।

