वाशिंगटन: नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नॉर्वे की नोबेल कमेटी पर निशाना साधा है। दक्षिण अफ्रीकी मूल की भारतीय न्यायविद् नवी पिल्लई को पुरस्कार दिए जाने पर नाराजगी जताते हुए ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने दुनिया के आठ बड़े संघर्षों को सुलझाने में भूमिका निभाई है। उनके मुताबिक, इस योगदान के लिए उन्हें एक नहीं, बल्कि आठ नोबेल शांति पुरस्कार मिलने चाहिए थे।
ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर लंबी पोस्ट साझा कर पुरस्कार चयन पर सवाल उठाए। उन्होंने नवी पिल्लई पर इजरायल विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। ट्रंप ने दावा किया कि उनके प्रयासों के बावजूद नोबेल कमेटी ने अमेरिका के योगदान को नजरअंदाज किया।
ट्रंप ने गिनाए आठ संघर्ष
ट्रंप ने जिन आठ संघर्षों को सुलझाने का श्रेय लिया, उनमें कंबोडिया-थाईलैंड, कोसोवो-सर्बिया, कांगो-रवांडा, भारत-पाकिस्तान, इजरायल-ईरान, मिस्र-इथियोपिया, आर्मेनिया-अजरबैजान और इजरायल-हमास के बीच संघर्ष शामिल हैं।
उन्होंने इजरायल और हमास के बीच बंधकों की रिहाई में भी अपनी भूमिका का दावा किया। साथ ही कहा कि ईरान और रूस-यूक्रेन संघर्ष सहित अन्य विवादों को सुलझाने के प्रयास जारी हैं। ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
शहबाज शरीफ ने किया समर्थन
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्रंप के योगदान का समर्थन करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने नोबेल शांति पुरस्कार के लिए उनके नाम की सिफारिश की थी। शरीफ ने उम्मीद जताई कि शांति स्थापित करने के ट्रंप के प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलेगी।
भारत ने मध्यस्थता के दावे को नकारा
भारत ने भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम कराने के ट्रंप के दावे को खारिज किया है। भारत का कहना है कि संघर्षविराम दोनों देशों के बीच सीधे सैन्य संपर्क से हुआ था, इसमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं थी।
भारत के मुताबिक, 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद सात मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया। इसके बाद 10 मई को पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशक ने भारतीय समकक्ष से संपर्क किया था।
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नोबेल कमेटी ने पिल्लई के चयन का किया बचाव
नोबेल कमेटी ने नवी पिल्लई के चयन का बचाव करते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों के क्षेत्र में उनके योगदान को महत्वपूर्ण बताया। पिल्लई युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों और नरसंहार से जुड़े मामलों में न्याय की पैरवी के लिए जानी जाती हैं।
इस बीच, अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) के खिलाफ अतिरिक्त प्रतिबंधों की घोषणा की। वाशिंगटन ने इसके पीछे अमेरिकी संप्रभुता से जुड़े हितों का हवाला दिया।

