बालाघाट: मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में स्वास्थ्य विभाग का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां एक व्यक्ति करीब 17 साल तक फर्जी एमबीबीएस डिग्री के सहारे सरकारी डॉक्टर की नौकरी करता रहा। इतना ही नहीं, वह ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) के पद तक भी पहुंच गया। मामला बिरसा के पूर्व बीएमओ डॉ. सुनील कुमार सिंह का है। पांच महीने की जांच में उनकी एमबीबीएस डिग्री और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं। इसके बाद 10 अक्टूबर को बिरसा थाने में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। फिलहाल पुलिस उनकी तलाश कर रही है।
एक ही डिग्री पर दो डॉक्टर, ऐसे खुला मामला
इस फर्जीवाड़े का खुलासा अप्रैल 2026 में हुआ, जब स्वास्थ्य विभाग को पता चला कि बालाघाट और देवास में एक ही नाम और शैक्षणिक योग्यता वाले दो डॉक्टर नौकरी कर रहे हैं। दोनों के दस्तावेजों में नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि, मेडिकल कॉलेज और डिग्री प्राप्त करने का वर्ष एक जैसा था। इसके बाद विभाग ने दोनों के दस्तावेजों की जांच शुरू कराई।
जांच में देवास में पदस्थ डॉक्टर की डिग्री सही मिली, जबकि बालाघाट के सुनील सिंह की एमबीबीएस डिग्री और 10वीं-12वीं की मार्कशीट फर्जी पाई गई। उनके स्थायी मेडिकल पंजीयन का रिकॉर्ड भी नहीं मिला।
2009 में नौकरी, 2023 में बने बीएमओ
जानकारी के अनुसार, सुनील सिंह ने वर्ष 2008-09 में संविदा डॉक्टर के रूप में नौकरी शुरू की थी। वर्ष 2012 में उन्हें नियमित किया गया और बाद में बीएमओ की जिम्मेदारी भी मिल गई। वर्ष 2023 में वह बिरसा के बीएमओ बने। इस दौरान उन्होंने सरकारी वेतन लिया और मरीजों का इलाज भी किया।
हैरानी की बात यह है कि वर्ष 2017-18 में भी उनके दस्तावेजों को लेकर शिकायत हुई थी। उस समय उन्हें हटाने के आदेश दिए गए थे, लेकिन न्यायालय से राहत मिलने के बाद वह नौकरी करते रहे।
बैगा बच्चों की मौत के बीच सामने आया मामला
बालाघाट का बिरसा क्षेत्र पहले से ही बैगा आदिवासी बच्चों की मौत को लेकर चर्चा में है। यहां मई से अब तक कम से कम 32 बच्चों की मौत दर्ज की गई है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताते हुए संबंधित सरकारों से जवाब मांगा है।
इसी बीच बिरसा में वर्षों तक पदस्थ रहे डॉक्टर की डिग्री फर्जी मिलने से स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल और बढ़ गए हैं। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे बच्चों की मौत का सीधा संबंध आरोपी डॉक्टर से साबित होता हो।
जून में हटाया, जुलाई से ड्यूटी पर नहीं लौटा
मामले की जांच के दौरान जून 2026 में सुनील सिंह को बीएमओ पद से हटाकर दमोह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया गया था। इसके बाद वह चिकित्सा अवकाश पर चले गए और जुलाई से ड्यूटी पर वापस नहीं लौटे।
स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर 9 अक्टूबर को शासन ने एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। इसके बाद बिरसा पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 340(2) और 336(3) के तहत मामला दर्ज किया।
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स्वास्थ्य विभाग की जांच व्यवस्था पर सवाल?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना सही डिग्री और स्थायी मेडिकल पंजीयन के कोई व्यक्ति इतने वर्षों तक सरकारी नौकरी कैसे करता रहा। नियुक्ति, नियमितीकरण और पदोन्नति के समय उसके दस्तावेजों की जांच क्यों नहीं हुई।
अब पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज कैसे तैयार किए गए और क्या इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका रही है। फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।

