दिल्ली: राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करने की जगहों को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। सरकार ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया है। समिति की सिफारिशों के आधार पर अब रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को प्रदर्शन के लिए नए स्थल के रूप में नामित किया गया है।
दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR पर रोक लगाने की मांग को लेकर सोमवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी। हालांकि, पुलिस ने इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया।
सीजेपी ने किया था प्रदर्शन
इससे पहले CJP ने 20 जून से 25 जुलाई तक NEET पेपर लीक के बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए प्रदर्शन किया था। 36 दिन तक चले इस प्रदर्शन के दौरान एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी भूख हड़ताल पर बैठे थे।
जंतर-मंतर पर 33 साल से प्रदर्शन शुरू हुए
1988 में बोट क्लब पर बड़ा किसान आंदोलन हुआ था। किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान दिल्ली पहुंचे थे। इसके बाद बोट क्लब पर भीड़ जुटाने को लेकर सख्ती बढ़ गई।
1993 में बोट क्लब पर प्रदर्शन करने पर रोक लगी
1993 में बोट क्लब पर प्रदर्शन करने पर रोक लगा दी गई। इसके बाद जंतर-मंतर पर धरने और प्रदर्शन होने लगे। यह संसद के पास था, इसलिए यहां प्रदर्शन करके सरकार तक अपनी बात पहुंचाना आसान था। धीरे-धीरे यह प्रदर्शन की बड़ी जगह बन गया।
हालांकि, उस समय जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल बनाने के लिए कोई अलग से औपचारिक सरकारी मंजूरी नहीं दी गई थी। दिल्ली पुलिस वहां प्रदर्शन करने की अनुमति देने लगी और धीरे-धीरे यह व्यवस्था चलन में आ गई।
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2017 में जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शन रोकने का आदेश आया
2017 में जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शन रोकने का आदेश आया। आसपास रहने वाले लोगों ने शोर और गंदगी की शिकायत की थी। इसके बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने वहां प्रदर्शन रोकने और प्रदर्शनकारियों को रामलीला मैदान भेजने का आदेश दिया।
2018 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक लगाने के बजाय नियम बनाने की बात कही। इसके बाद जंतर-मंतर पर नियमों के तहत प्रदर्शन करने का रास्ता खुला।

