नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के एटा जिले में खेत के बीच बने दो-तीन कमरों से फर्जी मेडिकल कॉलेज चलाए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्रवाई की अदालत ने सराहना की है। साथ ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और उच्च शिक्षा से जुड़ी अन्य संस्थाओं को निर्देश दिए हैं कि वे छात्रों और अभिभावकों को फर्जी कॉलेजों के प्रति जागरूक करें, ताकि कोई भी छात्र बिना मान्यता वाले संस्थान में दाखिला लेकर अपना भविष्य खराब न करे।
दाखिले से पहले कॉलेज की मान्यता जांचने की सलाह
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि किसी भी कॉलेज या विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने से पहले उसकी मान्यता और जरूरी अनुमति की जांच करना बेहद जरूरी है। अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि वह इस बात की निगरानी करे कि शिक्षा से जुड़े नियामक संस्थान समय-समय पर छात्रों को फर्जी कॉलेजों के बारे में जानकारी दे रहे हैं या नहीं।
खेत के बीच बने मकान में चल रहा था मेडिकल कॉलेज
मामला एटा जिले के महमूदपुर नगरिया गांव का है। यहां खेत के बीच बने एक पुराने मकान के दो-तीन कमरों से मेडिकल कॉलेज संचालित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। संस्थान में मेडिकल और पैरामेडिकल से जुड़े कई कोर्स कराए जाने का दावा किया जा रहा था, लेकिन वहां जरूरी सुविधाएं और मान्यता नहीं थीं।
जांच में सामने आया कि कॉलेज का चेयरमैन भगवान दास सिंह बघेल नाम का व्यक्ति था, जो चाय बेचने का काम करता था और ज्यादा पढ़ा-लिखा भी नहीं था। पूछताछ में उसने बताया कि कॉलेज वास्तव में सतेंद्र कुमार का है और वह केवल संस्थान के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करता था।
बिना मान्यता के चल रहे थे कई मेडिकल कोर्स
इस फर्जी संस्थान में डी.फार्मा, बी.फार्मा, बीएससी नर्सिंग, बीएएमएस और जीएनएम जैसे कोर्स चलाए जाने की जानकारी मिली थी। इसके अलावा डीएमएलटी, बीएमएलटी और एएनएम जैसे पैरामेडिकल कोर्स भी संचालित किए जा रहे थे।
मुख्य आरोपी समेत चार लोगों पर कार्रवाई
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने अदालत को बताया कि मुख्य आरोपी सतेंद्र कुमार और तीन अन्य लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई जारी है। मामले की स्वतंत्र जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
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एमिटी यूनिवर्सिटी की छात्रा की याचिका से जुड़ा मामला
सुप्रीम कोर्ट में यह मामला नोएडा की एमिटी यूनिवर्सिटी की एक छात्रा की याचिका से जुड़ी सुनवाई के दौरान सामने आया। अदालत ने निजी और डीम्ड विश्वविद्यालयों के कामकाज में कथित अनियमितताओं पर स्वतः संज्ञान लिया था।
कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से निजी विश्वविद्यालयों के गठन, संचालन और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं से जुड़ी जानकारी मांगी है। इसी सुनवाई के दौरान एटा के फर्जी मेडिकल कॉलेज पर हुई कार्रवाई की जानकारी भी अदालत के सामने रखी गई।

