भोपाल: राजधानी भोपाल में महिलाओं के एक समूह ने आस्था को समाजसेवा से जोड़ने की अनोखी पहल शुरू की है। यहां सकारात्मक सोच समूह की महिलाएं मंदिरों में फूल-मालाओं की जगह पेन, पेंसिल, कॉपी और किताबें चढ़ा रही हैं। इस पहल का उद्देश्य मंदिरों से निकलने वाले फूलों के कचरे को कम करना और जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाई का सामान उपलब्ध कराना है। समूह की इस कोशिश से पर्यावरण संरक्षण के साथ गरीब परिवारों के बच्चों को भी मदद मिल रही है।
मंदिरों में फूलों के कचरे से आया नया विचार
सकारात्मक सोच समूह की सदस्य अनीता ने बताया कि उनकी टीम लंबे समय से स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रही है। मंदिरों में बड़ी मात्रा में फूल-मालाएं चढ़ाई जाती हैं, जो कुछ समय बाद कचरे में बदल जाती हैं। इस सामग्री के सही उपयोग के लिए मंदिरों में डस्टबिन भी रखवाए गए, ताकि फूलों को नगर निगम के कलेक्शन सेंटर तक पहुंचाया जा सके। हालांकि कई बार यह सामग्री सामान्य कचरे में ही फेंक दी जाती थी।
इस समस्या को देखते हुए समूह की महिलाओं ने तय किया कि वे खुद से बदलाव की शुरुआत करेंगी। सभी सदस्यों ने मंदिरों में फूल-मालाओं की जगह स्टेशनरी का सामान चढ़ाने का संकल्प लिया। उनका मानना है कि भगवान के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ किसी जरूरतमंद बच्चे की मदद भी की जा सकती है।
2014 से स्वच्छता और समाजसेवा में सक्रिय समूह
समूह की सदस्य किरन शर्मा के अनुसार, सकारात्मक सोच समूह वर्ष 2014 से भोपाल में स्वच्छता को लेकर काम कर रहा है। इससे पहले समूह ने प्लास्टिक और डिस्पोजल का उपयोग कम करने के लिए बर्तन बैंक और कपड़े के थैलों का बैंक भी शुरू किया था।
समय के साथ समूह से कई महिलाएं जुड़ीं और जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए काम करने लगीं। समूह झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले बच्चों को निशुल्क पढ़ाने के साथ कुछ बच्चों की स्कूल फीस भी भर रहा है।
महिलाओं ने महसूस किया कि कई परिवार अपने बच्चों के लिए कॉपी-किताब और अन्य जरूरी सामान नहीं खरीद पाते। इसके बाद मंदिरों में स्टेशनरी चढ़ाने के विचार को आगे बढ़ाया गया। शुरुआत में गणेश मंदिर से इस संबंध में बातचीत की गई, जहां पहले से इस तरह की व्यवस्था थी। इसके बाद अन्य मंदिरों को भी अभियान से जोड़ने का प्रयास किया गया।
यह भी पढ़ें: राज्य स्तरीय ताइक्वांडो चैंपियनशिप में ईगल अकादमी के खिलाड़ियों ने जीते दो कांस्य पदक
फूल मुरझा जाते हैं, किताबें भविष्य संवार सकती हैं
समूह की महिलाओं का कहना है कि मंदिर में चढ़ाए गए फूल कुछ समय बाद मुरझा जाते हैं, लेकिन वही राशि किसी बच्चे की पढ़ाई पर खर्च की जाए तो उसका लंबे समय तक लाभ मिल सकता है। मंदिरों में चढ़ाई गई कॉपी, किताबें और पेन जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाए जा सकते हैं।
फिलहाल यह अभियान भोपाल के मंदिरों तक सीमित है, लेकिन समूह इसे दूसरे शहरों तक भी पहुंचाना चाहता है। महिलाओं की इस पहल से लोगों को संदेश मिल रहा है कि पूजा-पाठ के साथ समाज के जरूरतमंद लोगों की मदद करना भी महत्वपूर्ण है।
यह प्रयास न केवल मंदिरों में स्वच्छता बनाए रखने में मदद कर सकता है, बल्कि उन बच्चों के लिए भी सहारा बन सकता है जिनकी पढ़ाई आर्थिक परेशानियों के कारण प्रभावित होती है।

