नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता आशुतोष रांका और सौरव दास को दिल्ली की विशेष अदालत ने पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दोनों नेताओं को मंगलवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की कोशिश के दौरान पुलिस ने हिरासत में लिया था। इसके बाद देर रात करीब तीन बजे उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। मामले में गिरफ्तार तीसरे नेता अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया है।
सीजेपी की कानूनी टीम की प्रमुख रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि नेताओं के खिलाफ बिना अनुमति जंतर-मंतर में प्रवेश करने, पहले से निर्धारित मुचलके की शर्तों का उल्लंघन करने और सरकारी कामकाज में बाधा डालने के आरोप लगाए गए हैं। अदालत के आदेश के बाद आशुतोष रांका और सौरव दास को तिहाड़ जेल भेजे जाने की संभावना है।
11 अक्टूबर को 50-50 हजार रुपये के मुचलके पर मिली थी रिहाई
सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। इस दौरान पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान से ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया था।
तीनों को 11 अक्टूबर को दिल्ली कैंट स्थित विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। अदालत की कार्यवाही के बाद उन्हें 50-50 हजार रुपये के जमानती मुचलके पर रिहा कर दिया गया था। रिहाई की शर्तों के तहत उन्हें एक वर्ष तक शांति बनाए रखने और ऐसा कोई काम नहीं करने का बांड भरना पड़ा था, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका हो।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार
दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थलों को लेकर भी विवाद सामने आया है। केंद्र सरकार ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का फैसला किया है। करीब 33 वर्ष पहले जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शनों के लिए प्रमुख स्थल के रूप में निर्धारित किया गया था। अन्ना आंदोलन, पहलवानों के प्रदर्शन और सीजेपी के धरने जैसे कई आंदोलन यहां हो चुके हैं।
गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर दिल्ली के रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के एक अन्य मैदान को प्रदर्शन स्थलों के रूप में निर्धारित किया गया है।
सीजेपी ने 12 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर पर रोक लगाने की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद प्रदर्शन की कोशिश और पहले जारी बांड की शर्तों को लेकर पुलिस ने नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की।

