रामपुर: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़ी जौहर यूनिवर्सिटी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के आधार पर नई प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग, निर्माण कार्यों में अनियमितताओं और ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, अजीमनगर थाने में अपराध संख्या 224/26 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसकी विवेचना क्षेत्राधिकारी टांडा करेंगे।
ईडी के दस्तावेज में यूनिवर्सिटी परिसर की इमारतों की निर्माण लागत और ट्रस्ट के आयकर रिटर्न में दर्शाए गए पूंजीगत खर्च के बीच बड़े अंतर का उल्लेख है। इसके अलावा, सरकारी निर्माण कार्यों की सामग्री के कथित इस्तेमाल और विभिन्न मदों से मिली धनराशि की भी जांच की गई है। हालांकि, ये आरोप हैं और मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।
494 करोड़ के निर्माण और 78 करोड़ के खर्च का हिसाब
ईडी के दस्तावेज के मुताबिक, जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में बनी इमारतों की निर्माण लागत 494 करोड़ 46 लाख रुपये बताई गई है। वहीं, वित्तीय वर्ष 2013-14 से 2024-25 तक ट्रस्ट के आयकर रिटर्न में कुल पूंजीगत खर्च 78 करोड़ 32 लाख रुपये दर्ज किया गया है।
इन दोनों आंकड़ों के बीच करीब 416 करोड़ 14 लाख रुपये का अंतर बताया गया है। ईडी ने इस अंतर को लेकर सवाल उठाए हैं और निर्माण पर खर्च की गई राशि के स्रोत तथा वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की है। इस अंतर का कारण क्या है, यह जांच और संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
सरकारी निर्माण सामग्री यूनिवर्सिटी में लगाने का आरोप
ईडी के दस्तावेजों में आरोप लगाया गया है कि सरकारी ठेकों से जुड़ी निर्माण सामग्री का इस्तेमाल जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में किया गया। दस्तावेज में करीब 186 करोड़ रुपये के सरकारी ठेकों और निर्माण सामग्री की खरीद का उल्लेख है।
इसके अलावा, उत्तर प्रदेश जल निगम के जरिए यूनिवर्सिटी परिसर में निर्माण कार्यों के लिए 23 करोड़ 41 लाख रुपये और विधायक निधि से निजी परिसर में 6 करोड़ 60 लाख रुपये के कार्य कराए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
ईडी की जांच में इन मदों के तहत सरकारी धन के कथित इस्तेमाल और निर्माण कार्यों की प्रकृति को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इन आरोपों की पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर जांच के दौरान होनी है।
ट्रस्ट को मिले चंदे की भी जांच
मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को मिले चंदे और उसके वित्तीय लेन-देन की भी जांच की गई है। ईडी के दस्तावेज के मुताबिक, एक वेलफेयर सोसाइटी ने वित्तीय वर्ष 2013-14 से 2016-17 के बीच ट्रस्ट को 6 करोड़ 23 लाख 50 हजार रुपये दान दिए थे।
दस्तावेज में ठेकेदारों और अन्य संस्थाओं से मिले चंदे के स्रोत तथा ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन की पड़ताल का भी उल्लेख है। जांच एजेंसी ने कथित अनियमितताओं और सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग के संबंध में कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता बताई है।
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पुलिस ने क्या बताया?
रामपुर के एसपी अनिल कुमार सिंह के मुताबिक, ईडी की शिकायत पर अजीमनगर थाने में सरकारी धन और निर्माण सामग्री के कथित दुरुपयोग के मामले में FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच क्षेत्राधिकारी टांडा को सौंपी है। पुलिस का कहना है कि आगे की कार्रवाई साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

