भोपाल: मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए वर्ष 2027 अहम होने जा रहा है। मोहन यादव सरकार ने 2027 को ‘युवा वर्ष’ के रूप में मनाने की तैयारी की है। इसके तहत विभिन्न सरकारी विभागों में करीब एक लाख पदों पर सीधी भर्ती की योजना बनाई गई है। सामान्य प्रशासन विभाग ने विभागवार रिक्तियों और भर्ती प्रक्रिया को लेकर रोडमैप तैयार किया है। प्रस्तावित भर्ती अभियान में स्कूल शिक्षा विभाग और पुलिस विभाग में सबसे अधिक पद रखे गए हैं। हालांकि, भर्तियों का वास्तविक कार्यक्रम संबंधित भर्ती संस्थाओं की अधिसूचनाओं के बाद स्पष्ट होगा।
शिक्षक भर्ती में 18 हजार, पुलिस में 18,834 पद
सरकार की प्रस्तावित भर्ती योजना में स्कूल शिक्षा विभाग और गृह विभाग को प्राथमिकता दी गई है। विभागवार तैयार रूपरेखा के मुताबिक, स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षक वर्ग-1, वर्ग-2 और वर्ग-3 के करीब 18,000 पदों पर भर्ती की जाएगी। वहीं, गृह विभाग में आरक्षक, उपनिरीक्षक, सूबेदार और अन्य संवर्गों के कुल 18,834 पद भरने की योजना है।
ऊर्जा विभाग में सहायक अभियंता, कनिष्ठ अभियंता, टेस्टिंग असिस्टेंट सहित तकनीकी श्रेणियों के 3,969 पदों पर भर्ती प्रस्तावित है। इसके अलावा राजस्व विभाग में तहसीलदार और सहायक संवर्ग के पदों को भरने की तैयारी है। सामान्य प्रशासन विभाग में सहायक ग्रेड-3 और स्टेनोग्राफर के पद भी भर्ती योजना में शामिल हैं। इन विभागों के कुछ पदों की अंतिम संख्या अभी तय की जानी है।
वन, परिवहन और नगरीय विकास विभाग में भी अवसर
भर्ती रोडमैप में वन, परिवहन, सहकारिता, श्रम तथा नगरीय विकास एवं आवास विभाग को भी शामिल किया गया है। इन विभागों में लगभग 1,200 पदों पर भर्ती कराने का प्रस्ताव है।
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2028 तक कुल ढाई लाख भर्तियां पूरी करने का है। दिए गए आधिकारिक विवरण के अनुसार, अब तक करीब 80 हजार पदों पर नियुक्तियां पूरी की जा चुकी हैं। आगामी भर्ती अभियान को इसी लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
एक साथ होंगी परीक्षाएं, ऑनलाइन सत्यापन से मिलेगी राहत
सरकार भर्ती प्रक्रिया में लगने वाला समय कम करने के लिए समान श्रेणी के पदों को एक समूह में शामिल करने की योजना बना रही है। इससे अभ्यर्थियों को अलग-अलग पदों के लिए बार-बार होने वाली चयन प्रक्रियाओं से राहत मिल सकती है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत दस्तावेजों का सत्यापन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से कराया जाएगा। इससे अभ्यर्थियों को दस्तावेजों के सत्यापन के लिए अलग-अलग कार्यालयों में जाने की जरूरत कम होगी।
भर्तियां मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से कराई जाएंगी। वहीं, मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग वर्ष में दो बार परीक्षाएं आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। आयोग की इस पहल से विभिन्न विभागों के लगभग 1,200 पदों पर भर्ती प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।
ओबीसी आरक्षण विवाद से 13 हजार से अधिक नियुक्तियां अटकीं
नई भर्तियों के साथ सरकार के सामने पुरानी लंबित नियुक्तियों को पूरा करने की चुनौती भी है। अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण से जुड़े कानूनी विवाद के कारण 13 हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां प्रभावित हुई हैं।
राज्य में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले के बाद चयन प्रक्रिया में कुछ पदों के परिणाम और नियुक्तियां रोक दी गई थीं। इसके तहत ओबीसी और अनारक्षित वर्ग के चयनित अभ्यर्थियों से संबंधित 13 प्रतिशत पदों को होल्ड पर रखा गया था। बाद में आरक्षण से जुड़े कानूनी घटनाक्रम के कारण मामला और जटिल हो गया।
लंबित नियुक्तियों का समाधान निकालना सरकार के लिए अहम होगा, ताकि पहले से चयन प्रक्रिया में शामिल अभ्यर्थियों को भी राहत मिल सके और नई भर्तियों में अनावश्यक देरी न हो।
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मुख्यमंत्री ने भर्ती रोडमैप की समीक्षा की
मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप सामान्य प्रशासन विभाग ने भर्ती का रोडमैप तैयार किया है। मुख्यमंत्री ने इसकी समीक्षा करने के बाद संबंधित अधिकारियों को आगे की आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
अब भर्ती प्रक्रिया की गति इस बात पर निर्भर करेगी कि विभाग रिक्त पदों का अंतिम ब्योरा कब तक तय करते हैं और संबंधित भर्ती संस्थाएं परीक्षा कैलेंडर तथा विज्ञापन कब जारी करती हैं। फिलहाल, प्रस्तावित एक लाख भर्तियों से प्रदेश के युवाओं को सरकारी सेवा में आने के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

