भोपाल: मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में 1,134 करोड़ रुपये की अनियमित खरीदी के मामलों में विभाग ने कार्रवाई की है। कहीं 5 रुपये लीटर का फिनाइल 33,500 रुपये में खरीदा गया, तो कहीं 306 रुपये की एलईडी के लिए 11,800 रुपये चुकाए गए। कचरा वाहन खरीदी में भी गड़बड़ी सामने आई, जहां 20 वाहनों के बजाय सिर्फ 10 खरीदे गए। इन मामलों में सात अधिकारी-कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है, 76 की वेतनवृद्धि रोकी गई और 80 ठेकेदारों व फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। कुल 146 अधिकारी-कर्मचारी कार्रवाई के दायरे में आए हैं।
62 मामलों में कार्रवाई, 38 से वसूली के आदेश
नगरीय विकास एवं आवास विभाग की समीक्षा में वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही से जुड़े 62 मामलों में कार्रवाई की गई। सात कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया, जबकि 76 की वेतनवृद्धि रोकी गई। इसके अलावा 17 सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन या महंगाई राहत में कटौती की गई है।
विभाग ने 38 अधिकारी-कर्मचारियों से आर्थिक नुकसान की वसूली के आदेश दिए हैं। जांच में आरोप प्रमाणित नहीं होने पर 22 कर्मचारियों को दोषमुक्त कर दिया गया। वहीं, दो मामलों में संबंधित कर्मचारियों की मृत्यु होने के कारण कार्रवाई समाप्त कर दी गई।
ग्वालियर संभाग में सबसे ज्यादा कार्रवाई
संभागवार आंकड़ों के अनुसार, ग्वालियर में 16 प्रकरणों में 32 अधिकारी-कर्मचारी कार्रवाई के दायरे में आए। शहडोल में 10 प्रकरणों में 25 कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई। उज्जैन और इंदौर संभाग में सात से आठ प्रकरणों के दौरान 21-21 अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई।
भोपाल संभाग में चार प्रकरणों में 16, जबलपुर में छह प्रकरणों में 15, रीवा में पांच प्रकरणों में नौ और सागर संभाग में छह प्रकरणों में सात अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई।
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80 फर्में तीन साल तक ब्लैकलिस्ट
निर्माण कार्यों में देरी, काम शुरू नहीं करने, धीमी प्रगति और फर्जी अनुभव व टर्नओवर प्रमाणपत्र जमा करने जैसे मामलों में 80 फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। इनमें 48 मामले अमृत योजना और 19 मामले नगर निगम ग्वालियर से संबंधित हैं। फर्मों पर छह महीने से तीन साल तक का प्रतिबंध लगाया गया है।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में अनियमितताएं प्रमाणित हुई हैं, उनमें कार्रवाई की गई है और आगे भी यह प्रक्रिया जारी रहेगी।

