इंदौर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने जनसंख्या असंतुलन, धर्मांतरण, विदेशी फंडिंग से चलने वाले आंदोलनों और समाज के कुछ वर्गों में ‘हम हिंदू नहीं हैं’ की भावना को बड़ी सामाजिक चुनौती बताया है। संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर इंदौर में आयोजित चरैवेति एकत्रीकरण में अखिल भारतीय सह सरकार्यवाह अतुल लिमये ने कहा कि इन चुनौतियों का जवाब देने के लिए समाज को संगठित करना और सामाजिक आचरण में सकारात्मक बदलाव लाना जरूरी है।
शताब्दी वर्ष में भविष्य के लक्ष्यों पर मंथन
इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में संघ की 100 वर्षों की यात्रा, उपलब्धियों और आगामी लक्ष्यों पर चर्चा की गई। इस दौरान व्यक्ति निर्माण, शाखाओं के विस्तार और समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया।
अतुल लिमये ने कहा कि व्यक्ति निर्माण एक कठिन और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। संघ का काम केवल स्वयंसेवकों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे समाज तक पहुंचकर सकारात्मक परिवर्तन लाना भी इसका उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि संघ की अब तक की यात्रा का आकलन करने के साथ यह भी तय करना जरूरी है कि आने वाले वर्षों में किन लक्ष्यों को हासिल करना है।
सभी वर्गों को जोड़ने पर जोर
अतुल लिमये ने कहा कि शाखाओं के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है। संघ से जुड़ने के लिए किसी विशेष शैक्षणिक योग्यता की आवश्यकता नहीं है। समाज के सभी वर्गों के लोग इससे जुड़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि कन्याकुमारी से कश्मीर तक संघ का काम चल रहा है और विदेशों में भी उसकी गतिविधियां हैं।
उन्होंने कोरोना काल में स्वयंसेवकों की ओर से किए गए सेवा कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रचार विभाग और विश्व संवाद केंद्र के माध्यम से विचारों को समाज तक पहुंचाया जा रहा है। इसके साथ धर्म जागरण, गोसेवा और कुटुंब प्रबोधन जैसे विषयों पर भी काम किया जा रहा है।
लिमये ने कहा कि किसी भी संगठन के लिए संतुष्ट होकर बैठ जाना निष्क्रियता का कारण बन सकता है। इसलिए शाखाओं की संख्या बढ़ाने के साथ उनकी गुणवत्ता और प्रभावशीलता पर भी ध्यान देना जरूरी है।
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सामाजिक विषमता, भ्रष्टाचार और नशे पर भी चिंता
सह सरकार्यवाह ने सामाजिक विषमता, भ्रष्टाचार, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और सामाजिक विघटन को भी गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि समाज के सामने मौजूद इन समस्याओं से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
राम मंदिर अभियान का उल्लेख करते हुए लिमये ने बताया कि अभियान के दौरान 45 दिनों में करीब 14 करोड़ परिवारों और लगभग 70 करोड़ लोगों तक संपर्क किया गया था। इसमें अन्य समाजों के लोगों की भी सहभागिता रही। उन्होंने कहा कि भविष्य में समाज के शत-प्रतिशत लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखना चाहिए।
संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित इस एकत्रीकरण में संगठन के विस्तार के साथ सामाजिक सहभागिता बढ़ाने और आने वाले समय की चुनौतियों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया।

