जबलपुर। शहर में एक नेत्रहीन युवती के साथ हुई बदसलूकी ने न केवल संवेदनशील समाज की आत्मा को झकझोर दिया है, बल्कि राजनीति की मर्यादाओं पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। सामने आए दृश्य ने सत्ता, संस्कार और जवाबदेही को कठघरे में ला खड़ा किया है।
जबलपुर में भारतीय जनता पार्टी की नेत्री अंजू भार्गव द्वारा नेत्रहीन युवती से कथित बदसलूकी का मामला अब कानून और राजनीति, दोनों ही मोर्चों पर खूब शोर मचा रहा है। सोशल मीडिया में वायरल हो रहे वीडियो में भाजपा की नेत्री अंजू भार्गव नेत्रहीन युवती का हाथ मरोड़ते और अपशब्द कहते साफ तौर पर दिखाई और सुनाई देना जनमानस की भावनाओं को आहत कर रहा है। इस घटना ने संवेदनशीलता, महिला सुरक्षा और दिव्यांग अधिकारों पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
मामले ने तब और तूल पकड़ा जब कांग्रेस ने इसे केवल व्यक्तिगत आचरण नहीं, बल्कि सत्ता के मद में नेताओं के संरक्षण में पनपते असामाजिक व्यवहार का उदाहरण बताया। नगर कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ शर्मा ने पीड़िता से मुलाकात कर न्याय दिलाने का भरोसा दिया और स्पष्ट किया कि कांग्रेस न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी। पार्टी का कहना है कि दृश्य में दिख रही हरकतें किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हैं और दोषी को कानूनी दंड मिलना चाहिए।
अखिल भारतीय महिला कांग्रेस ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सामाजिक माध्यमों पर बयान जारी किया। संगठन ने कहा कि दृष्टिहीन लड़की के साथ मारपीट करने वाली महिला पार्टी की उप-जिलाध्यक्ष है और ऐसे असभ्य, असामाजिक तत्वों का समाज से बहिष्कार होना चाहिए। बयान में सत्तारूढ़ दल के संस्कारों पर भी सवाल उठाए गए।
कानूनी जानकारों के अनुसार, यदि दृश्य की प्रामाणिकता न्यायालय में सिद्ध होती है, तो यह दिव्यांग व्यक्ति के अधिकारों के उल्लंघन और मारपीट की धाराओं के अंतर्गत गंभीर अपराध बन सकता है। फिलहाल, पीड़िता और उसके परिवार की उम्मीदें न्याय प्रणाली पर टिकी हैं।
मानवता हुई शर्मसारः नेत्रहीन महिला से भाजपा नेत्री ने की बदसलूकी पर मचा सियासी संग्राम, न्यायालय जाएगी कांग्रेस
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