सीहोर। जनसुनवाई का उद्देश्य समस्याओं का शांतिपूर्ण समाधान होता है, लेकिन सीहोर कलेक्ट्रेट में यह मंच अचानक रणक्षेत्र बन गया। पति-पत्नी के विवाद ने ऐसा तूल पकड़ा कि अफसरों के सामने ही लात-घूंसे चलने लगे।
कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब पति-पत्नी और उनके परिजन आपस में भिड़ गए। मामूली विवाद से शुरू हुआ मामला देखते ही देखते मारपीट में बदल गया, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए।
जानकारी के अनुसार, महिला अपने पति के खिलाफ शिकायत लेकर जनसुनवाई में पहुंची थी। उसका आरोप था कि पति ने दूसरी महिला से शादी कर ली है और उसे व उसके दो बच्चों को छोड़ दिया है। सुनवाई के दौरान जब पति ने बच्चों को अपना नहीं बताया, तो माहौल तनावपूर्ण हो गया।
इस बयान से आक्रोशित पत्नी और उसके परिजन भड़क गए। देखते ही देखते दोनों पक्षों में तीखी बहस शुरू हो गई, जो जल्द ही हाथापाई में बदल गई। महिलाओं ने भी एक-दूसरे पर लात-घूंसे चलाए। कलेक्ट्रेट में मौजूद सुरक्षा कर्मियों और कर्मचारियों ने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों पक्षों को अलग किया।
घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि जनसुनवाई जैसे संवेदनशील मंच पर भी भावनात्मक मामलों को संभालने के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं क्यों नहीं हैं। प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जाएंगे।
यह घटना दर्शाती है कि पारिवारिक विवाद जब सार्वजनिक मंच पर पहुंचते हैं, तो संयम और संवेदनशीलता कितनी जरूरी हो जाती है।
न्याय की चौखट पर हंगामा, जनसुनवाई में पति-पत्नी और परिजनों की हाथापाई
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