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बालाघाट में एक बाघ और तीन तेंदुओं की मौत: वन विभाग की लापरवाही पर भड़के किशोर समरीते, CM से माफी और श्वेत पत्र की मांग

लांजी, संयुक्त क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं लांजी-किरनापुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक किशोर समरीते ने बालाघाट जिले में हालिया वन्यजीव मौतों पर गंभीर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार और वन विभाग पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि एक माह के भीतर एक बाघ और तीन तेंदुओं की मौत बेहद गंभीर मामला है, जिसके लिए मुख्यमंत्री को श्वेत पत्र जारी कर जनता से माफी मांगनी चाहिए।
किशोर समरीते ने आरोप लगाया कि बाघ संरक्षण के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार और WWF द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी रात्रि गश्त नहीं कर रहे। बालाघाट में 2000 से अधिक वन कर्मचारी तैनात हैं, जिन्हें बड़े बंगले, वाहन, डीजल-पेट्रोल और सुविधाएं दी जा रही हैं, फिर भी वे बंगलों से बाहर नहीं निकलते और रात्रि गश्त छोड़कर पार्टी करते हैं।
मुख्य आरोप:
अधिकारियों की लापरवाही: CCF, PCCF, DFO, SDO और रेंजर वर्षों से रात्रि गश्त नहीं कर रहे।
जांच की मांग: इनकी टूर डायरी, वाहनों की लॉग बुक की जांच हो और पूरे मामले की CBI जांच कराई जाए।
भ्रष्टाचार का आरोप: जंगलों के संरक्षण के लिए प्रतिवर्ष 500 करोड़ रुपये से अधिक आते हैं, जो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाते हैं।
मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी: वन मंत्री होने के नाते CM इन मौतों के लिए जिम्मेदार हैं और उन्हें श्वेत पत्र जारी कर माफी मांगनी चाहिए।
समरीते ने कहा कि बाघ संरक्षण प्राधिकरण के चेयरमैन प्रधानमंत्री हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारियां निभाई नहीं जा रही। ये मौतें वन विभाग की घोर लापरवाही का प्रमाण हैं।
हाल के महीनों में मध्य प्रदेश में बाघों की मौतों का सिलसिला जारी है, जिसमें बालाघाट जिला भी प्रभावित रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष और संरक्षण में कमी इसके प्रमुख कारण हैं।

 

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