भोपाल। भले ही मुख्यमंत्री मोहन यादव प्रदेश को विकसित प्रदेश बनाने की बातें खुले मंचों से करते नहीं थकते। लेकिन विकास धरातल पर कितना हो रहा है इसकी बानगी प्रदेश की राजधानी में गोविंदपुरा विधानसभा अंतर्गत वार्ड 62 की सड़कों को देखकर मिल जाती है। ऐसा नहीं है कि रहवासियों ने अपना वोट नहीं दिया, या फिर वे कोई रोहिंग्या और बांग्लादेशी भी नहीं हैं। फिर भी आईबीडी कॉलोनी की जर्जर सड़कें बार-बार शिकायतें करने के बाद भी निर्माण नहीं होना जनप्रतिनिधियों को कटघरे में खड़ा करती है। सबसे ज्यादा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और जनसुनवाई जैसे सुविधाओं की कलई भी खुलकर वास्तविकता सामने आ जाती है।
राजधानी भोपाल के गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र की एक हकीकत से आज हम आपको रूबरू करवा रहे हैं आई.बी.डी. रायसिना कॉलोनी, एनआरआई कॉलेज के सामने वार्ड क्रमांक- 62 के निवासियों कि विगत 5 वर्षों से मांग है कि रायसेन रोड से आईबीडी रायसिना कॉलोनी और खजूरी कलां तक 12 मीटर आरसीसी रोड (2.5 किमी लंबी) के निर्माण कार्य के लिए क्षेत्रीय पार्षद, विधायक, सांसद सहित प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं। रहवासियों द्वारा बैठक भी जनप्रतिनिधियों के साथ की गई। बावजूद इसके समस्या का समाधान नहीं हो सका स्थानीय विधायक, मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने शासन को कई बार इस संदर्भ में सड़क निर्माण के लिए बजट जारी करने का पत्र प्रेषित किया। लेकिन लोक निर्माण विभाग मंत्री ने उन पत्रों को नजर अंदाज करते हुए कचरे की टोकरी में डाल दिया गया है।
मंत्री के निवास पर बैठक नतीजा शून्य
मंत्री कृष्णा गोर के निवास पर एक बैठक की गई रायसेन रोड से आबीडी रायसिना कॉलोनी से खजूरी कलां तक 12 मीटर आरसीसी सड़क निर्माण से सम्बंधितां के साथ बैठक की गयी। प्रसाशन 12 मीटर चौड़ी मार्ग की अनुशंसा तो मिली और मंत्री कृष्णागौर द्वारा सड़क निर्माण के लिए 2025-26 के आवंटन तथा अनुपूरक बजट वर्ष 2025-26 में शामिल हेतु अनुरोध किया गया हैं। किन्तु, अभीतक बजट आवंटित नहीं होना कई सवालों को जन्म देता है। परिणामस्वरुप सड़क निर्माण नहीं हो पा रहा है और जर्जर सड़क पर आए दिन हादसे हो रहे हैं।
सड़क, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहवासी
10 फीट चौड़ी टूटी- फूटी सड़क और भारी यातायात के चलते आये दिन होने वाली दुर्घटनाएं परेशानी का कारण बनी हुई हैं। यहां तक की यहां से कॉलेजों की निकलती बसों के चलते लोगों को घंटों तक इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में घटित घटनाओं के बाद जरूरत पड़ने पर आपातकालीन सेवाओं में एंबुलेंस जैसी सुविधाएं भी आसानी से नहीं पहुंच पाती है।
मंत्री की भी नहीं हो रही सुनवाई
गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक एवं मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर के द्वारा प्रदेश सरकार को विगत 5 वर्षों से इस समस्या निराकरण करने की गुहार लगाई गई। अधिकारियों को भी अवगत कराया गया इसके बावजूद भी प्रदेश सरकार के कान पर जू नहीं रेंगती है। गूंगी-बहरी सरकार अभी तक बजट जारी नहीं किया करना नागरिकों के साथ खिलवाड़ है।
आखिर कहां करें शिकायत
क्षेत्रीय विधायक एवं मंत्री को सौंपे गए पत्रों पर मध्यप्रदेश शासन अभी तक विचार क्यों नहीं किया गया? क्यों बजट और अनुपूरक बजट में इस मार्ग को शामिल नहीं किया जाता? गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस मार्ग की उपेक्षा क्या जानबूझ कर की जा रही है?
मोहन सरकार में मंत्रियों की भी नहीं हो रही सुनवाई, पांच साल से अनुमोदन के बाद जारी नहीं हुआ सड़क का बजट
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