कतर, दोहा। ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच छिड़ा युद्ध अब भयानक स्थिति में पहुंच गया है। ईरान अब बदले की भावना से खाड़ी देशों में मौजूद तेल और गैस के ठिकानों पर हमला कर आर्थिक नुकसान पर उतारू हो गया। बुधवार को ईरान ने कतर स्थित दुनिया के सबसे बड़े गैस प्लांट रास लाफान पर हमला कर दिया। इससे 17 प्रतिशत हिस्सा तबाह हो गया और उत्पादन प्रभावित होगा। भारत यहां से एलएनजी आयात का 47 प्रतिशत गैस की आपूर्ति पर निर्भर है।
कतर एनर्जी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी साद अल-काबी के अनुसार, इस हमले से तरलीकृत प्राकृतिक गैस निर्यात क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है। मरम्मत कार्यों के चलते अगले 3 से 5 वर्षों तक हर साल लगभग 12.8 मिलियन टन गैस उत्पादन बाधित रहेगा। इसका असर भारत, चीन और कई यूरोपीय देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ेगा।
इस घटना से कतर को भी भारी आर्थिक नुकसान हुआ है, जो लगभग 20 अरब डॉलर सालाना आंका गया है। प्रभावित संयंत्रों में अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की हिस्सेदारी होने के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है।
अल-काबी ने कहा कि इस हमले ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता की छवि को गहरा आघात पहुंचाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्पादन बहाली से पहले क्षेत्र में शत्रुता समाप्त होना आवश्यक है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो भारत में गैस की कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति संकट की स्थिति बन सकती है, जिसका असर उद्योगों और आम उपभोक्ताओं दोनों पर पड़ेगा।
दुनिया का सबसे बड़ा गैस प्लांट ईरान ने किया तबाह, भारत की गैस सप्लाई पर पांच सालों तक पड़ेगा असर
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