इंडिगो संकट पर केंद्र का बड़ा प्रहारः फ्लाइट्स पर ब्रेक क्यों लगा? अंदरूनी अव्यवस्था का बड़ा खुलासा

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नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो पिछले दिनों अचानक ऑपरेशनल संकट में फंस गई, जिससे हजारों यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। सरकार ने अब सख्त कदम उठाते हुए उसके विंटर शेड्यूल से 115 फ्लाइट्स हटाने का आदेश दिया है। पायलट थकान नियमों और क्रू मैनेजमेंट की गड़बड़ियों ने पूरा तंत्र हिला दिया।
भारत के एविएशन सेक्टर में पिछले कुछ सप्ताह अभूतपूर्व उथल-पुथल से भरे रहे। इंडिगो, जो सामान्य दिनों में देश में रोज करीब 2200 उड़ानें संचालित करती है, अचानक फ्लाइट कैंसिलेशन की लहर में फंस गई। एयरपोर्ट्स पर यात्रियों की लंबी कतारें, गुस्से भरी शिकायतें और सोशल मीडिया पर बाढ़ जैसी शिकायतों ने इस संकट को राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बना दिया। पहली बार केंद्र सरकार ने सीधे हस्तक्षेप करते हुए इंडिगो के विंटर शेड्यूल से करीब 115 फ्लाइट्स हटाने का आदेश दिया है। यह सिर्फ दंडात्मक कदम नहीं, बल्कि पूरे सेक्टर को एक संदेश भी है, लापरवाही की कोई जगह नहीं। सवाल यही है, आखिर ऐसा क्या हुआ कि तैयार विमानों के बावजूद इंडिगो उड़ानें संचालित नहीं कर सकी?
सरकारी जांच में जो तथ्य उभरकर सामने आए, वे चौंकाने वाले हैं। हकीकत यह थी कि इंडिगो अपनी सबसे मजबूत मानी जाने वाली क्रू प्लानिंग और पायलट रोस्टरिंग में ही ढह गई। नए फ्लाइट सेफ्टी नियमों के तहत पायलटों को अधिक डाउनटाइम यानी आराम देने का प्रावधान लागू हुआ, जिससे थकान के कारण होने वाली दुर्घटनाओं का जोखिम कम किया जा सके। यह नियम वैश्विक मानकों के अनुरूप है, लेकिन इंडिगो लंबे समय से कम डाउनटाइम मॉडल पर चल रही थी। जैसे ही नियम लागू हुए, अचानक क्रू की भारी कमी सामने आ गई। परिणाम-विमान उड़ान के लिए तैयार थे, पर पायलट उपलब्ध नहीं।
यही वजह थी कि एक ही हफ्ते में 7,30,000 से ज्यादा टिकट कैंसल हुए और 745 करोड़ रुपये के रिफंड की प्रक्रिया चलानी पड़ी, इतना बड़ा आंकड़ा खुद बताता है कि संकट कितना गहरा था।
नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने संसद में इसे स्पष्ट शब्दों में मैनेजमेंट फेलियर बताया। उनके अनुसार, इंडिगो समय रहते अपने क्रू प्लानिंग सिस्टम को अपडेट कर सकती थी, लेकिन उसने देरी की और इसकी कीमत यात्रियों को चुकानी पड़ी।
सरकार ने यह भी संकेत दिया कि भारत जैसे विशाल देश में कम से कम 5 मजबूत एयरलाइंस जरूरी हैं। यह बयान इंडिगो के लिए चेतावनी जैसा माना जा रहा है, अगर कोई कंपनी नियमों से ऊपर समझेगी, तो बाज़ार में विकल्प तैयार किए जाएंगे।
अब बड़ा प्रश्न यह है कि क्या यह संकट सिर्फ इंडिगो तक सीमित रहेगा, या फिर नए सेफ्टी नियमों के प्रभाव से आने वाले महीनों में अन्य एयरलाइंस भी दबाव में आएंगी? एविएशन जगत में विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना भारत के हवाई सफर के इतिहास में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है। साफ है- उड़ान अब सिर्फ समय पर टेकऑफ़ का खेल नहीं; बल्कि सुरक्षा, मानवीय प्रबंधन और पारदर्शिता की सबसे बड़ी परीक्षा है।