भारत का वन संरक्षण मॉडल दुनिया के सामने
श्योपुर। अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में वन्य संरक्षण इतिहास का महत्वपूर्ण दिन दर्ज हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मादा चीता वीरा और उसके 10 महीने के दो शावकों को खुले जंगल में छोड़ा, जिसके बाद पार्क में अब कुल 19 चीते खुले जंगल में हो गए हैं।
कार्यक्रम और नए विकास
फील्ड मैनुअल फॉर क्लीनिकल मैनेजमेंट ऑफ फ्री-रेंजिंग चीताज़ का विमोचन किया और सोवेनियर शॉप का लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला, सीएस अनुराग जैन और एसीएस अशोक वर्णवाल उपस्थित थे।
सीएम यादव का वक्तव्य -‘चीता हमारे लिए कोहिनूर
सीएम ने कहा-
.एशिया में चीतों का पुनर्स्थापन लगातार सफल हो रहा है
.मध्यप्रदेश में फिलहाल 32 चीते मौजूद हैं
.श्योपुर अंतरराष्ट्रीय पहचान का केंद्र बन चुका है
उन्होंने बताया कि तीसरी पीढ़ी के शावक भी अब कूनो में मौजूद हैं और स्थानीय लोगों ने चीतों के साथ सहजीविता अपनाई है। इससे वन-पर्यटन में पाँच गुना वृद्धि हुई और रोजगार के नए अवसर पैदा हुए।
सफलता के संकेत और तकनीकी सुरक्षा
वन विशेषज्ञों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में पाँच मादा चीतों ने छह बार शावकों को जन्म दिया, जो प्रोजेक्ट की सफलता का मजबूत संकेत है।
चीतों की निगरानी के लिए रेडियो-ट्रैकिंग सिस्टम और फील्ड टीमें लगातार सक्रिय हैं।
पर्यटन और आर्थिक प्रभाव
कूनो पार्क के परोंड क्षेत्र को विशेष पर्यटन जोन घोषित किया गया है। यहां चीता परिवार की मौजूदगी ईको-टूरिज्म को बढ़ावा दे रही है, जिससे स्थानीय लोगों में उत्साह बढ़ा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत की थी, जब नामीबिया से 8 चीते लाए गए थे। आज कूनो और गांधी सागर में कुल 32 चीते मौजूद हैं।
संरक्षण से विकास तक का सफल सफर
कूनो का चीता मिशन राष्ट्र के वन संरक्षण मॉडल की बड़ी उपलब्धि है और आगामी वर्षों में इसे वैश्विक उदाहरण माना जाएगा।
कूनो में फिर गूंजा चीता मिशनः डॉ. यादव ने छोड़े 3 चीते, बोले ये हमारे लिए कोहिनूर


