जबलपुर: मध्य प्रदेश में सामने आए 34 करोड़ रुपये के धान परिवहन घोटाले को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने घोटाले की जांच का दायरा पूरे प्रदेश तक बढ़ाते हुए सभी जिलों के कलेक्टरों को अपने-अपने क्षेत्रों में जांच कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की पीठ ने की।
फर्जी वाहनों से धान ढुलाई का मामला
जनहित याचिका के जरिए सामने आए मामले में बताया गया कि जबलपुर में धान परिवहन के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं मिली थीं। रिकॉर्ड में ऐसे वाहनों के नंबर दर्ज किए गए, जिनसे 100 से 200 क्विंटल तक धान का परिवहन दिखाया गया। इनमें दोपहिया और तिपहिया वाहन भी शामिल थे।
कुछ मामलों में बसों जैसे वाहनों से भी बड़ी मात्रा में धान ढोना दर्शाया गया, जबकि इन वाहनों से इतनी मात्रा में धान ले जाना संभव नहीं था। जबलपुर में प्रारंभिक जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ 90 से अधिक एफआईआर दर्ज की गई थीं।
HC ने सभी जिलों में जांच के दिए निर्देश
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि जबलपुर में सामने आई गड़बड़ी से आशंका है कि इस तरह की अनियमितताएं प्रदेश के दूसरे जिलों में भी हुई हो सकती हैं। मंडला, बालाघाट, सिवनी और डिंडौरी सहित अन्य जिलों में भी धान परिवहन से जुड़े मामले सामने आए हैं।
अदालत ने अब प्रदेश के सभी जिलों में जांच कराने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में जांच कर रिपोर्ट पेश करनी होगी।
सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन और EOW से भी मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन को शपथ पत्र के साथ अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। वहीं आर्थिक अपराध ब्यूरो (EOW) को मामले की जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी होगी।
पहले 27 जिलों को दिए गए थे जांच के निर्देश
याचिका में बताया गया कि सरकार पहले प्रदेश के 27 जिलों के कलेक्टरों को जांच के निर्देश दे चुकी थी। हालांकि, याचिकाकर्ता का आरोप है कि जमीनी स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि केवल एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में धान परिवहन से जुड़े रिकॉर्ड की व्यापक जांच जरूरी है।

