अयोध्या। रामनगरी अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे में कथित गड़बड़ी को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। मंदिर के दान प्रबंधन से जुड़े कई लोगों पर करीब 7 करोड़ रुपये के चढ़ावे में हेराफेरी के आरोप लगे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जो लगातार संदिग्धों से पूछताछ कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी साफ कहा है कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
कौन हैं जांच के केंद्र में आए 6 प्रमुख चेहरे?
रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू
रामशंकर यादव, जिन्हें टिन्नू के नाम से जाना जाता है, पहले राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी के ड्राइवर रहे हैं। जांच के दौरान उनके नाम से अयोध्या और लखनऊ में करोड़ों रुपये की संपत्ति होने के दावे सामने आए हैं। आरोप है कि उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में कई प्लॉट और व्यावसायिक निवेश किए। हालांकि टिन्नू ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनकी आय के वैध स्रोत हैं और वे किसी भी जांच में सहयोग करने को तैयार हैं।
मनीष यादव
टिन्नू यादव के भतीजे मनीष यादव पर भी जांच एजेंसियों की नजर है। वे दान पेटियों से निकले नोटों की गिनती से जुड़े कार्यों में शामिल बताए जाते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक उनकी निशानदेही पर लाखों रुपये बरामद किए गए हैं। SIT अब उनके वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों की भी जांच कर रही है।
गोपाल राव
राम मंदिर के प्रशासनिक प्रबंधन और व्यवस्थाओं से जुड़े गोपाल राव भी जांच के दायरे में हैं। मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं और दान प्रबंधन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। उन पर आर्थिक अनियमितताओं के आरोप लगाए जा रहे हैं, हालांकि उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा है कि उन्होंने स्वयं भी पारदर्शी जांच की मांग की थी।
लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा
जीजा-साले की यह जोड़ी भी जांच एजेंसियों के रडार पर है। दोनों दान पात्रों से निकली राशि की गिनती करने वाली टीम का हिस्सा बताए जाते हैं। आरोप है कि बीते कुछ वर्षों में उनकी आर्थिक स्थिति में अचानक बड़ा बदलाव आया। फॉर्महाउस, मकान और अन्य संपत्तियों को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। परिवार का कहना है कि दोनों के खिलाफ लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं।
केडी तिवारी
मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले सोने-चांदी के आभूषणों की देखरेख का जिम्मा संभालने वाले केडी तिवारी भी जांच के घेरे में हैं। हाल के वर्षों में उनकी संपत्तियों में हुई वृद्धि को लेकर सवाल उठे हैं। उन्होंने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि उनकी संपत्ति पारिवारिक आय और वैध स्रोतों से अर्जित की गई है।
डॉ. अनिल मिश्रा
राम मंदिर ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में शामिल डॉ. अनिल मिश्रा का नाम भी चर्चा में है। मंदिर निर्माण और दान प्रबंधन से जुड़े अहम निर्णयों में उनकी भूमिका रही है। हालांकि उनके खिलाफ अब तक कोई प्रत्यक्ष आरोप सिद्ध नहीं हुआ है, लेकिन जांच एजेंसियां उनसे जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों की भी समीक्षा कर रही हैं।
SIT की जांच पर टिकी निगाहें
वहीं पूरे मामले में प्रशासन और जांच एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्तियों और बैंक लेन-देन की पड़ताल कर रही हैं। फिलहाल जांच जारी है और किसी भी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं किया गया है। अंतिम निष्कर्ष SIT की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
बात दें देश और दुनिया से करोड़ों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचते हैं और राम मंदिर में दान करते हैं। ऐसे में चढ़ावे की राशि को लेकर सामने आए आरोपों ने लोगों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर जांच एजेंसियों की कार्रवाई और अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है।

