नई दिल्ल। कृतिम बुद्धि एआई के दुष्पपरिणाम अब सामने आने लगे हैं, जहां एक दिन पहले मध्यप्रदेश के इंदौर में युवक और युवति ने नौकरी जाने के बाद चोरी जैसे अपराध का रास्ता अपनाया था, वहीं दूसरी तरफ ग्रेटर नोएडा में एक नाबालिग छात्रा पर एआई से चीटिंग के शक होने के आरोप के बाद आत्माहत्या जैसा जघन्य कदम उठाने मामला प्रकाश में आया है। यह दोनों ही प्रकरणों ने यह सोचने पर विवश कर दिया है कि क्या? कृत्रिम बुद्धि एआई का उपयोग बढाने में सावधानी और सर्तकता की जरूरत नहीं है। वहीं इस घटना के बाद परिजनों ने स्कूल पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
ग्रेटर नोएडा में 16 साल की एक छात्रा की मौत ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। यह घटना तब हुई जब 10वीं की छात्रा से प्री-बोर्ड परीक्षा के दौरान एआई टूल्स का उपयोग करने के शक के आधार पर स्कूल प्रबंधन द्वारा पूछताछ की गई। पुलिस के अनुसार, छात्रा के मोबाइल में परीक्षा के दौरान एआई आधारित मदद का उपयोग पाया गया। स्कूल के शिक्षक और प्रिंसिपल ने उससे कई सवाल किए। इधर, छात्रा के पिता का कहना है कि उनकी बेटी को स्कूल प्रशासन द्वारा मानसिक उत्पीड़न और सार्वजनिक अपमान का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि बेटी को अपमानित करने और डराने की वजह से बेटी मानसिक दबाव में आ गई। लिहाजा उसने अपनी जान दे दी। पिता ने थाने में शिकायत दर्ज कराई और स्कूल अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
क्या एआई-के उपयोग के शक में हुई छात्रा की मौत?
पुलिस की माने तो मृतक छात्रा का मोबाइल फोन परीक्षा के दौरान कथित तौर पर एआई-आधारित मदद मांगना पाया गया है। इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने उससे पूछताछ की। परिवारजनों को कहा कि पूछताछ के बाद अपमानजनक व्यवहार से आहत उनकी बेटी ने इस जघन्य कदम को उठाया है। जबकि स्कूल ने इस आरोप का खंडन करते हुए कहा कि छात्रा को सीबीएसी परीक्षा नियमों के अनुसार उसे डांटा गया और स्कूल प्रशासन ने इस घटना से इनकार किया है। प्रिंसिपल का कहना है कि छात्रा से हुई बातचीत नियमों के अनुसार और संक्षिप्त रूप में की गई थी, जिसमें किसी प्रकार का दुर्व्यवहार नहीं हुआ। स्कूल ने बताया कि छात्रा का मोबाइल जब्त किया गया था और उसे सीबीएससी परीक्षा नियमों के अनुसार डांटा गया।
मामले की हो रही गहनता से जांच
पुलिस को स्कूल द्वारा सीसीटीव्ही फुटेज उपलब्ध कराई गई है और मामले की जांच जारी है। जांच यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि छात्रा पर वास्तव में मानसिक दबाव डाला गया था या नहीं।
क्या स्कूल द्वारा उचित प्रक्रिया का पालन किया?
स्कूल ने कहा कि छात्रा का मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया और केवल नियमों का पालन करते हुए छात्रा को डांटा गया। प्रिंसिपल ने बातचीत को संक्षिप्त और बिना किसी दुर्व्यवहार की बात कही गई है। हालांकि, परिवार ने आरोप लगाया कि स्कूल द्वारा उनकी बेटी का सार्वजनिक तौर पर अपमान किया और मानसिक दबाव डाला जिससे छात्रा गहरे तनाव में आ गई और उसने यह कदम उठाया। मामले की जांच चल रही है। यह जांच यह निर्धारित करेगी कि पूछताछ और शिक्षक व्यवहार किस हद तक छात्रा पर दबाव डालने वाला था।
क्या एआई और डिजिटल टूल्स ने स्कूल में विवाद खड़ा कर दिया?
इस घटना ने एआई टूल्स और डिजिटल मदद के उपयोग को लेकर स्कूलों में सख्ती पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्राओं और छात्रों को डिजिटल टूल्स के प्रयोग और परीक्षा नियमों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों को सख्ती और अनुशासन के बीच संवेदनशीलता बनाए रखनी चाहिए, ताकि छात्र मानसिक रूप से सुरक्षित रहें और एआई-आधारित आधुनिक उपकरणों के लिए डर न महसूस करें।
परीक्षा में एआई से मदद लेने का स्कूल ने छात्रा पर लगाया आरोप, आहत छात्रा ने दी जान


