प्रेम-प्रसंग के चलते बालिकाओं को बहला-फुस्लाने में कामयाब हो जाते हैं आरोपी
इंदौर। नाबालिग विशेषकर बच्चियों के अचानक गायब होने की घटनाएं आज केवल मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश की भयावह वास्तविकता बन चुकी हैं। दर्दनाक सच यह है कि महीनों में नहीं, बल्कि हर एक दिन देशभर से कई दर्जन बच्चियों के लापता होने की घटनाएं दर्ज होती हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस का विशेष अभियान मुस्कान कारगर साबित हो रहा है। इंदौर पुलिस प्रशासन तरपरता ने यह सिद्ध किया है। इसी कड़ी में हर वर्ष नवंबर माह में चलाया जाने वाला ’’“ऑपरेशन मुस्कान”’’ एक बड़ा और प्रभावी खोज अभियान साबित हुआ है, जिसके नतीजे इस बार भी सुखद रहे हैं।
इंदौर पुलिस ने 1 नवंबर से 30 नवंबर तक मात्र 30 दिनों में ’’140 लापता बच्चों को खोज निकालने में सफलता प्राप्त की’’। इनमें ’’107 बच्चियां और 33 बच्चे’’ शामिल हैं। यह उपलब्धि बताती है कि संगठित प्रयास, संवेदनशीलता और सतत खोज मिशन किस तरह अनेकों परिवारों की जिंदगी में रोशनी वापस ला सकते हैं।
मीडिया को एडिशनल कमिश्नर ’’आर. के. सिंह’’ ने बताया कि अभियान की शुरुआत थानों में दर्ज सभी लापता बच्चों की सूची तैयार कर की गई। इस आधार पर विशेष टीमें गठित की गईं और चारों पुलिस जोनों में व्यापक खोज अभियान चलाया गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब हर गुमशुदा बच्चे के मामले को अपहरण की धारा में दर्ज किया जाता है, जिसके चलते जांच में तेजी और गंभीरता दोनों बढ़ी हैं।
पुलिस के अनुसार अधिकांश मामलों में ’’नाबालिग बच्चियां प्रेम संबंधों के कारण घर छोड़ देती हैं’’ और कई बच्चों को दूसरे शहरों से भी बरामद किया गया है। यह स्थिति परिवार और समाज दोनो के लिए चिंता का विषय है और जागरूकता की गंभीर आवश्यकता बताती है।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि ’’इंदौर में हर साल लगभग 1000 बच्चे लापता होते हैं’’, लेकिन मुस्कान जैसे अभियानों ने इस संकट को काफी हद तक नियंत्रित किया है। इस प्रयास ने ना केवल सैकड़ों परिवारों की खोई मुस्कान लौटाई है, बल्कि समाज में सुरक्षा और उम्मीद की नई दिशा भी दिखाई है।
मुस्कान अभियान से रोशन हुए 140 घरः इंदौर पुलिस ने 30 दिन में ढूंढ निकाले खोए मासूम


