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भोपाल के केरवा डैम में 19 अतिक्रमण का खुलासा, सरकारी विभागों के निर्माण भी जांच के दायरे में

भोपाल: राजधानी के केरवा डैम में अतिक्रमण को लेकर किए गए सर्वे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। निरीक्षण दल की रिपोर्ट के अनुसार, डैम के फुल टैंक लेवल (FTL), बफर जोन और ग्रीन बेल्ट में कुल 19 अतिक्रमण चिह्नित किए गए हैं। इनमें निजी व्यक्तियों के साथ सरकारी विभागों के निर्माण भी शामिल बताए गए हैं। सर्वे के दौरान जलाशय के किनारे मिट्टी का भराव, पत्थर की दीवारें, आरसीसी पिलर और निर्माणाधीन परिसर पाए जाने की जानकारी सामने आई है।

इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के बेटे अजय सिंह और पूर्व विधायक जितेंद्र डागा से जुड़े निर्माण भी एफटीएल क्षेत्र में मिलने का दावा किया गया है। हालांकि, इन निर्माणों की वैधानिक स्थिति और संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

सात गांवों में मिले अतिक्रमण

सर्वे के दौरान केरवा डैम से लगे मेंडोरा, बरखेड़ी बाज्याफ्त, कुशलपुरा, मुल्ला जी की टेकरी, फतेहपुर डोगरा, महुआखेड़ा और मीटूखेड़ी गांवों में अतिक्रमण चिह्नित किए गए।निरीक्षण दल ने मौके पर जीपीएस लोकेशन और समय के साथ तस्वीरें भी लीं। इन तस्वीरों में जलाशय के किनारे निर्माण कार्य, पानी की ओर बढ़ती दीवारें और अन्य संरचनाएं दिखाई देने की जानकारी दी गई है।

खास बात यह है कि अतिक्रमण की सूची में मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम और जल संसाधन विभाग जैसे सरकारी विभागों के निर्माण भी शामिल बताए गए हैं। इससे सरकारी जमीन और जलाशय की सुरक्षा को लेकर विभागों की जिम्मेदारी पर सवाल उठ रहे हैं।

अधिकारी के तबादले से देर से शुरू हुआ निरीक्षण

केरवा डैम का निरीक्षण सुबह शुरू होना था, लेकिन मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के भोपाल क्षेत्रीय अधिकारी के अचानक तबादले के कारण देरी हुई।जानकारी के अनुसार, पुराने और नए क्षेत्रीय अधिकारी के दोपहर में मौके पर पहुंचने के बाद ही निरीक्षण शुरू हो सका।निरीक्षण दल में याचिकाकर्ता राशिद नूर खान, पर्यावरण

विशेषज्ञ डॉ. सुभाष सी. पांडेय, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक प्रवीण कोठारी, वेटलैंड अथॉरिटी के वैज्ञानिक दिनेश दामले, नगर निगम के पुण्डरीक द्विवेदी और जल संसाधन विभाग के शांतनु सिंह शामिल रहे।इसके अलावा वन विभाग की एक महिला अधिकारी और संबंधित क्षेत्रों के पटवारी भी मौजूद थे।

सभी अधिकारियों की उपस्थिति का पंचनामा तैयार किया गया।दल ने केरवा डैम रोड से कुशलपुरा रोड तक जलाशय के किनारों का निरीक्षण किया। कई घंटे चले इस सर्वे का समापन मीटूखेड़ी क्षेत्र में बने विवादित पुल के पास हुआ।

मीटूखेड़ी में बिना अनुमति पुल निर्माण का मामला

निरीक्षण में मीटूखेड़ी क्षेत्र में केरवा नदी पर सीमेंट-कंक्रीट का पुल बनाए जाने का मामला भी सामने आया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पुल का निर्माण आवश्यक अनुमति और वैज्ञानिक अध्ययन के बिना किया गया है।

इस निर्माण से नदी के प्राकृतिक बहाव में बाधा आने और बाढ़ का खतरा बढ़ने की आशंका जताई गई है। केरवा नदी जलाशय में पानी पहुंचाने वाले महत्वपूर्ण स्रोतों में शामिल है। ऐसे में नदी के प्रवाह में किसी भी तरह की रुकावट पर्यावरण और आसपास के क्षेत्रों के लिए चिंता का विषय बन सकती है।

एनजीटी के आदेश के बाद भी नहीं हटा अतिक्रमण

महुआखेड़ा गांव के खसरा नंबर 30, 33 और 34 में मिट्टी के भराव को लेकर भी सवाल उठे हैं।जानकारी के अनुसार, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 4 फरवरी 2026 को इस क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन निरीक्षण के दौरान मिट्टी का भराव पहले की तरह ही मौजूद मिला।

मौके पर जलाशय के किनारे मिट्टी की ऊंची मेड़ और पानी के अंदर तक लगे तार फेंसिंग के खंभे भी पाए गए।रिपोर्ट में इन गतिविधियों को वेटलैंड नियम 2017 और जल अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन माना गया है।

डैम की सीमा बताने वाले निशान भी गायब

सर्वे के दौरान एक और गंभीर मामला सामने आया है। डैम की सीमा निर्धारित करने के लिए लगाई गई मुनारें तीन स्थानों पर गायब मिलीं, जबकि एक स्थान पर उनके खिसकाए जाने की जानकारी सामने आई है।

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अब एनजीटी की कार्रवाई पर नजर

केरवा डैम में 19 अतिक्रमण मिले हैं, जिसमें निजी के साथ सरकारी विभागों के निर्माण भी शामिल हैं। निर्देशों के बाद भी कई जगह अतिक्रमण नहीं हटे। अब रिपोर्ट NGT में पेश होगी, जिसके बाद कार्रवाई तय होगी।

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