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60 बैगा बच्चों की मौतों पर विधायक संजय उइके ने CM-CS को लिखा पत्र

बच्चों की मौतों की उच्चस्तरीय जांच की मांग

बालाघाट/भोपाल: बालाघाट जिले के बैहर विधानसभा क्षेत्र में बैगा आदिवासी बच्चों की बीमारी, कुपोषण और मृत्यु की घटनाओं को लेकर अब राजनीतिक एवं प्रशासनिक स्तर पर गंभीर पहल की मांग उठने लगी है। बैहर विधानसभा क्षेत्र के विधायक संजय उइके ने इस संवेदनशील मुद्दे को प्रदेश सरकार के समक्ष उठाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश शासन को विस्तृत पत्र लिखा है। उन्होंने बैगा आदिवासी बहुल गांवों में लगभग 60 बच्चों की मृत्यु के मामलों का उल्लेख करते हुए पूरे प्रकरण की प्रदेश स्तर से उच्चस्तरीय जाँच कराने और प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष स्वास्थ्य एवं पोषण मिशन शुरू करने की मांग की है।

विधायक ने अपने पत्र में कहा है कि बैहर विधानसभा क्षेत्र के बैगा बहुल गांवों में खसरा (मीजल्स), मलेरिया एवं अन्य बीमारियों के कारण बच्चों की मृत्यु की घटनाएं अत्यंत चिंताजनक हैं। मृत बच्चों में अनेक बच्चे कुपोषण से भी प्रभावित थे। यह स्थिति केवल स्वास्थ्य विभाग की समस्या नहीं है, बल्कि विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) में शामिल बैगा समुदाय के बच्चों के जीवन, पोषण, स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा गंभीर मानवीय विषय है।

आखिर क्यों लगातार बीमारियों और कुपोषण की चपेट में आ रहे हैं बैगा बच्चे?

विधायक संजय उइके ने शासन के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल उठाया है कि आखिर बैगा आदिवासी बहुल गांवों में बच्चे लगातार बीमारी और कुपोषण से प्रभावित क्यों हो रहे हैं? उन्होंने कहा कि बच्चों की मृत्यु के पीछे केवल संक्रामक बीमारियां ही नहीं, बल्कि गरीबी, खाद्य असुरक्षा, परिवारों की कमजोर आर्थिक स्थिति, स्वच्छ पेयजल की कमी, साफ-सफाई, मातृ स्वास्थ्य, टीकाकरण में कमी, स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित पहुंच तथा समय पर उपचार नहीं मिल पाना जैसे अनेक कारण भी हो सकते हैं।

उन्होंने मांग की है कि इन सभी पहलुओं की वैज्ञानिक एवं सामाजिक परिस्थितियों के आधार पर गहन पड़ताल कराई जाए। जब तक कुपोषण और बीमारी के वास्तविक कारणों की पहचान नहीं होगी, तब तक स्थायी समाधान संभव नहीं है।

60 बच्चों की मृत्यु की प्रदेश स्तर से हो निष्पक्ष जाँच

विधायक ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से मांग की है कि बैहर विधानसभा क्षेत्र के बैगा बहुल गांवों में हुई बच्चों की मृत्यु की घटनाओं की प्रदेश स्तर से उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए। जाँच में यह भी पता लगाया जाए कि प्रभावित क्षेत्रों में समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गई थीं या नहीं, बच्चों का नियमित टीकाकरण हुआ अथवा नहीं, मलेरिया की रोकथाम के लिए पर्याप्त उपाय किए गए या नहीं तथा आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण आहार का वितरण नियमानुसार हुआ या नहीं।

इसके साथ ही पेयजल की गुणवत्ता, स्वास्थ्य विभाग की मैदानी व्यवस्था और संबंधित विभागों के दायित्वों के निर्वहन की भी समीक्षा कराई जाए। यदि कहीं लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए।

नक्सलमुक्त बालाघाट के विकास में पूरे जिले को मिले समान अवसर

विधायक संजय उइके ने पत्र में बालाघाट जिले के पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने कहा कि बालाघाट को नक्सलमुक्त घोषित किए जाने के बाद लगभग 100 गांवों के विकास के लिए विशेष योजनाएं बनाए जाने की बात सामने आ रही है, लेकिन जिले में नक्सलवाद का प्रभाव केवल इन 100 गांवों तक सीमित नहीं रहा है।

जिले के अनेक ग्रामीण, आदिवासी एवं वनांचल क्षेत्रों ने भी वर्षों तक नक्सलवाद के कारण विकास संबंधी चुनौतियों का सामना किया है। ऐसे में विशेष विकास योजनाओं का लाभ केवल चुनिंदा गांवों तक सीमित रखना उचित नहीं होगा। उन्होंने मांग की है कि जिले के समस्त पूर्व नक्सल प्रभावित, पिछड़े, आदिवासी एवं वनांचल क्षेत्रों को भी इन योजनाओं में शामिल किया जाए, जिससे विकास का लाभ सभी जरूरतमंद क्षेत्रों तक पहुंच सके।

बैगा बच्चों के लिए अलग से बने विशेष स्वास्थ्य एवं पोषण मिशन

विधायक ने अपने पत्र में सरकार के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल रखा है कि जब नक्सलमुक्त गांवों के विकास के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जा सकती है, तो PVTG श्रेणी में शामिल बैगा जनजाति के बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण एवं जीवन सुरक्षा के लिए अलग से विशेष मिशन क्यों नहीं शुरू किया जा सकता?

उन्होंने मांग की है कि बैगा बहुल गांवों के लिए ऐसी कार्ययोजना तैयार हो, जिसमें नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों की निगरानी, कुपोषित बच्चों का उपचार, टीकाकरण, मलेरिया एवं अन्य संक्रामक बीमारियों की रोकथाम, स्वच्छ पेयजल, पोषण आहार और स्वास्थ्य सुविधाओं की घर-घर तक पहुंच सुनिश्चित की जाए।

बैगा परिवारों की वास्तविक स्थिति जानने कराया जाए बेसलाइन सर्वे विधायक ने बालाघाट जिले में निवासरत बैगा जनजाति का व्यापक बेसलाइन सर्वेक्षण कराने की भी मांग की है। इसमें बैगा परिवारों की आर्थिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक स्थिति, रोजगार, खाद्य सुरक्षा, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा बच्चों के पोषण स्तर का विस्तृत आकलन किया जाए।

उनका मानना है कि जब तक बैगा परिवारों की वास्तविक स्थिति का आंकड़ों के आधार पर आकलन नहीं होगा, तब तक उनके लिए बनाई जाने वाली योजनाएं प्रभावी नहीं हो पाएंगी। इसलिए सर्वेक्षण के आधार पर गांववार जरूरतें तय कर योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाना चाहिए।

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तात्कालिक राहत के साथ दीर्घकालिक समाधान की जरूरत

विधायक संजय उइके ने स्पष्ट किया है कि इस गंभीर समस्या का समाधान केवल स्वास्थ्य शिविर लगाने या कुछ समय के लिए उपचार की व्यवस्था करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके लिए शासन को स्थायी व्यवस्था विकसित करनी होगी। प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता, बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी, विभागीय समन्वय, पर्याप्त बजट और समयबद्ध कार्ययोजना की आवश्यकता है।

उन्होंने मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव से अनुरोध किया है कि इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्चस्तरीय जाँच के आदेश दिए जाएं तथा बैगा बहुल गांवों के लिए विशेष स्वास्थ्य, पोषण, पेयजल एवं सामाजिक सुरक्षा कार्ययोजना तैयार कर उसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

विधायक संजय उइके की इस पहल ने बैगा आदिवासी बच्चों के स्वास्थ्य और जीवन सुरक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण सवाल को प्रदेश सरकार के सामने रखा है। अब देखना होगा कि सरकार इस गंभीर विषय पर कितनी शीघ्रता से संज्ञान लेकर जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाती है।

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