मोहन कैबिनेट की हालिया बैठक में लिए गए फैसले राज्य की आर्थिक संरचना को मजबूत करने और समावेशी विकास को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत देते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में व्यापार, कृषि, आधारभूत ढांचे और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई बड़े निर्णय लिए गए, जो आने वाले समय में प्रदेश की विकास दिशा तय कर सकते हैं। सबसे अहम निर्णय मप्र व्यापार कल्याण बोर्ड के गठन का है, जो राष्ट्रीय स्तर की तर्ज पर राज्य में व्यापारियों के हितों को संगठित तरीके से सामने लाने का मंच बनेगा। इसमें सरकारी और गैर-सरकारी सदस्यों की भागीदारी से यह उम्मीद की जा सकती है कि छोटे और मध्यम व्यापारियों की समस्याएं नीति-निर्माण तक प्रभावी ढंग से पहुंचेंगी। जिला स्तर तक इसकी संरचना का विस्तार इस पहल को और अधिक जमीनी बनाएगा। कृषि क्षेत्र में दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के लिए 2442 करोड़ रुपये की स्वीकृति यह दर्शाती है कि सरकार फसल विविधीकरण और आय बढ़ाने की दिशा में गंभीर है। देश में बढ़ती दालों की मांग को देखते हुए यह पहल किसानों के लिए आर्थिक अवसर भी पैदा कर सकती है। वहीं गेहूं उपार्जन के आंकड़े और किसानों को समय पर भुगतान, सरकार की खरीद प्रणाली की मजबूती को दर्शाते हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर पर 38,555 करोड़ रुपये के प्रावधान, विशेषकर ग्रामीण सड़कों और आवासों के रखरखाव पर जोर, विकास के संतुलित मॉडल को रेखांकित करता है। सड़क सुरक्षा और कनेक्टिविटी में सुधार न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देगा, बल्कि निवेश आकर्षित करने में भी मददगार होगा। भोपाल के पास प्रस्तावित इलेक्ट्रॉनिक क्लस्टर और आईटी निवेश को प्रोत्साहन, राज्य को तकनीकी और औद्योगिक मानचित्र पर नई पहचान दिला सकते हैं। हालांकि, इन घोषणाओं की वास्तविक सफलता उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, पारदर्शिता बनी रहे और समयबद्धता सुनिश्चित हो, यही सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। कुल मिलाकर, यह कैबिनेट बैठक मप्र के विकास के बहुआयामी एजेंडे को सामने रखती है, जिसे जमीन पर उतारना ही असली कसौटी होगी।
-मिलिंद ठाकरे

