तिरुवनंतपुरम। केरल की सियासत इस वक्त पूरी तरह हाई वोल्टेज मोड में है। लंबे इंतजार के बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस अब मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर खुद अपने ही अंदर घिरती नजर आ रही है। वी.डी. सतीशन, के.सी. वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला के बीच सीएम कुर्सी की रेस ने पार्टी के भीतर हलचल तेज कर दी है। दिल्ली से लेकर तिरुवनंतपुरम तक बैठकों का दौर जारी है, लेकिन अब तक फाइनल नाम पर मुहर नहीं लग सकी है।
केरल कांग्रेस में ‘सीएम वॉर’ तेज
जानकारी अनुसार, कांग्रेस के तीन बड़े चेहरे इस वक्त मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे बताए जा रहे हैं। एक तरफ संगठन और हाईकमान के करीबी माने जाने वाले के.सी. वेणुगोपाल हैं, तो दूसरी तरफ जमीनी पकड़ वाले वी.डी. सतीशन। वहीं वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला भी अनुभव और पुराने राजनीतिक समीकरणों के दम पर मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं।
दिल्ली में मैराथन मीटिंग, फिर भी नहीं निकला नाम
बता दें दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर कई घंटों तक चली हाई लेवल मीटिंग के बाद भी तस्वीर साफ नहीं हो सकी। बैठक में राहुल गांधी, खरगे, केसी वेणुगोपाल, सतीशन, चेन्निथला समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे। सूत्रों के मुताबिक तीनों नेताओं से अलग-अलग बातचीत की गई और साफ संदेश दिया गया कि अंतिम फैसला हाईकमान ही करेगा।
सड़क पर उतरे समर्थक, पोस्टर-पॉलिटिक्स शुरू
वहीं सीएम फेस को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि समर्थक सड़कों पर उतर आए। कई जिलों में नेताओं के समर्थन में पोस्टर, फ्लेक्स और प्रदर्शन देखने को मिले। तिरुवनंतपुरम, एर्नाकुलम, त्रिशूर और वायनाड तक राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। हालांकि बाद में पार्टी नेतृत्व ने हस्तक्षेप कर पोस्टर हटवाए और कार्यकर्ताओं से संयम बरतने की अपील की।
किसका पलड़ा भारी?
सूत्रों के मुताबिक, अधिकांश विधायक के.सी. वेणुगोपाल के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर वी.डी. सतीशन की लोकप्रियता ज्यादा बताई जा रही है। वहीं रमेश चेन्निथला का अनुभव उन्हें रेस से बाहर नहीं होने दे रहा। कांग्रेस अब ऐसा चेहरा तलाश रही है जो सरकार और संगठन दोनों को संतुलित रख सके।
जीत बड़ी, लेकिन चुनौती उससे भी बड़ी
केरल में UDF गठबंधन ने 140 में से 102 सीटें जीतकर ऐतिहासिक वापसी की है। कांग्रेस ने अकेले 63 सीटों पर जीत दर्ज की, लेकिन सरकार गठन से पहले ही अंदरूनी खींचतान पार्टी के लिए नई चुनौती बन गई है। कर्नाटक के बाद अब केरल में भी नेतृत्व की लड़ाई कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ाती दिख रही है।
अब पूरा फैसला कांग्रेस आलाकमान के हाथ में है। पार्टी जल्द ही नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान कर सकती है। माना जा रहा है कि सरकार गठन की अंतिम तारीख से पहले कांग्रेस किसी भी हालत में यह सस्पेंस खत्म करना चाहती है, ताकि सत्ता की शुरुआत विवादों के बजाय स्थिरता के साथ हो सके।

