भोपाल। पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा है कि नीति आयोग द्वारा जारी रिपोर्ट मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का जीता-जागता प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री मोहन यादव के ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश’ के दावों की वास्तविकता उजागर करती है।
अजय सिंह ने कहा कि 21वीं सदी में जब देश डिजिटल इंडिया की बात कर रहा है, तब मध्य प्रदेश के करीब साढ़े 13 हजार स्कूल बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार इन्हीं अंधेरे कमरों से प्रदेश का भविष्य गढ़ना चाहती है।
उन्होंने छात्राओं के लिए शौचालयों की कमी को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। सिंह ने कहा कि लगभग दो हजार स्कूलों में छात्राओं के लिए शौचालय नहीं हैं, जो ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ जैसे नारों पर करारा तमाचा है। उन्होंने कहा कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बेटियां शिक्षा से दूर हो रही हैं।
पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदेश के स्कूलों में 52 हजार से अधिक पद खाली पड़े हैं, जिनमें प्राथमिक स्कूलों के 45 हजार से ज्यादा शिक्षक पद शामिल हैं। इसके अलावा सात हजार से अधिक स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि शिक्षा बजट का भारी-भरकम पैसा आखिर खर्च कहां हो रहा है।
अजय सिंह ने कहा कि स्कूलों की बदहाल स्थिति के कारण 3 लाख 37 हजार बच्चों ने प्राथमिक शिक्षा बीच में ही छोड़ दी। वहीं माध्यमिक स्तर पर लगभग 17 प्रतिशत ड्रॉपआउट दर सरकार की विफलता को दर्शाती है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश के छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जहां 99 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा उपलब्ध है, वहीं मध्य प्रदेश के 40 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर तक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि संदीपनी स्कूलों के प्रचार में व्यस्त सरकार को नीति आयोग की रिपोर्ट ने आईना दिखा दिया है।

