रांची। आलमगीर आलम को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने झारखंड के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता आलमगीर आलम को जमानत दे दी है। कोर्ट ने उनके निजी सचिव (PS) संजीव लाल को भी बेल प्रदान की है।
बता दें यह मामला राज्य के कुछ सरकारी विभागों में टेंडर दिलाने के बदले कथित कमीशन और रिश्वतखोरी से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि कॉन्ट्रैक्टरों से बड़े पैमाने पर अवैध वसूली की गई थी, जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कार्रवाई शुरू की थी।
विधानसभा चुनाव के दौरान हुई थी गिरफ्तारी
जानकारी अनुसार, आलमगीर आलम की गिरफ्तारी उस समय हुई थी, जब झारखंड में विधानसभा चुनाव का माहौल गर्म था। ED की रेड और गिरफ्तारी के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। विपक्ष ने इसे भ्रष्टाचार का बड़ा मामला बताया था, जबकि कांग्रेस ने कार्रवाई को राजनीतिक दबाव से जोड़कर देखा था।
इस मामले में पहले झारखंड हाईकोर्ट ने आलमगीर आलम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अब शीर्ष अदालत ने सुनवाई के बाद उन्हें राहत देते हुए जमानत मंजूर कर ली है।
क्या है पूरा मामला?
जांच एजेंसियों के अनुसार, सरकारी विभागों में टेंडर आवंटन के बदले कथित तौर पर कमीशन लिया जाता था। आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए अवैध रकम इकट्ठा की गई और उसे मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए छिपाने की कोशिश हुई। इसी सिलसिले में ED ने कई ठिकानों पर छापेमारी भी की थी।
सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद झारखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस इसे कानूनी प्रक्रिया में मिली राहत बता रही है, जबकि विपक्ष अब भी मामले को भ्रष्टाचार से जोड़कर सरकार और पार्टी पर निशाना साध रहा है।

