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बच्चों पर बढ़ा निवेश, मप्र ने ‘चाइल्ड बजटिंग’ में बनाया नया रिकॉर्ड

भोपाल। मप्र सरकार ने बच्चों के सर्वांगीण विकास को ‘विकसित मध्यप्रदेश @2047’ की मजबूत नींव बताते हुए वर्ष 2026-27 के बजट में रिकॉर्ड प्रावधान किए हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा में किया गया निवेश प्रदेश के भविष्य को मजबूत करेगा।

भोपाल के होटल कोर्टयार्ड मैरियट में महिला एवं बाल विकास विभाग और UNICEF के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “चाइल्ड बजटिंग इन मध्यप्रदेश” प्रशिक्षण कार्यशाला में मंत्री भूरिया ने कहा कि सरकार बच्चों के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के बजट में बच्चों से जुड़ी योजनाओं के लिए 26 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि की गई है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और पोषण क्षेत्र के लिए 23 हजार 747 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें ‘पोषण 2.0’ जैसी प्रमुख योजनाएं शामिल हैं। वहीं, राज्य के कुल व्यय का 13.7 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च किया जाएगा।

मंत्री भूरिया ने कहा कि बच्चों का विकास केवल महिला एवं बाल विकास विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। अब चाइल्ड बजट स्टेटमेंट में 19 विभागों को शामिल किया गया है। स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य और सामाजिक न्याय विभागों को साझा लक्ष्य के साथ काम करना होगा, ताकि योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से बच्चों तक पहुंच सके। उन्होंने प्रदेश के 55 जिलों की अलग-अलग जरूरतों का उल्लेख करते हुए अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार योजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए।

महिला एवं बाल विकास आयुक्त निधि निवेदिता ने कहा कि प्रदेश की लगभग 40 प्रतिशत आबादी यानी करीब 3 करोड़ बच्चे हैं। इसलिए चाइल्ड बजट की रिपोर्टिंग को अधिक वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विभागों को केवल आंकड़ों तक सीमित न रहकर योजनाओं के वास्तविक प्रभाव पर भी ध्यान देना होगा।

विलियम हैनलोन जूनियर ने कहा कि मध्यप्रदेश चाइल्ड बजटिंग के पांच सफल वर्ष पूरे कर चुका है और अब राज्य परिणाम आधारित बजटिंग की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों और लैंगिक समानता को ध्यान में रखते हुए बजट प्रावधानों पर विशेष जोर देने की बात कही। क्रिस्टीना पोपीवानोवा ने कहा कि ‘विकसित भारत @2047’ का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब बच्चों पर होने वाले निवेश को भविष्य की उत्पादकता से जोड़कर देखा जाएगा।

महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक अभिताभ अवस्थी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में बाल बजट के तहत 75 हजार 587 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह राज्य के कुल बजट का 19.4 प्रतिशत और सकल घरेलू उत्पाद का 4.1 प्रतिशत है। कार्यशाला के तकनीकी सत्रों का संचालन पूजा सिंह ने किया, जिसमें 19 विभागों के प्रतिनिधियों ने बजट प्रक्रिया और योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े अनुभव साझा किए।

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