भोपाल। मप्र में चल रहे जल संरक्षण अभियान को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में राजधानी भोपाल में सदानीरा समागम का आयोजन होने जा रहा है। 27 मई से 2 जून तक भारत भवन में आयोजित इस सात दिवसीय आयोजन में जल संकट, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं पर राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर मंथन होगा।
आयोजकों के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव के नेतृत्व में चल रहे ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ को जनभागीदारी से जोड़ने के उद्देश्य से यह समागम आयोजित किया जा रहा है। अब तक प्रदेश में तालाबों, कुओं, बावड़ियों और नदियों के संरक्षण से जुड़े 1.77 लाख से अधिक कार्य पूरे किए जा चुके हैं।
उज्जैन से होगी शुरुआत, शिप्रा परिक्रमा बनेगी आकर्षण
मुख्य आयोजन से पहले 25 और 26 मई को उज्जैन में शिप्रा तीर्थ परिक्रमा निकाली जाएगी। यात्रा रामघाट से प्रारंभ होकर प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचेगी। इस दौरान मुख्यमंत्री द्वारा मां शिप्रा को 300 फीट लंबी चुनरी अर्पित की जाएगी।सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोकगायिका मैथिली ठाकुर, भारतीय नौसेना बैंड और विभिन्न कलाकार प्रस्तुतियां देंगे। आयोजकों का कहना है कि 22 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा अब जल संरक्षण जनजागरण का प्रतीक बन चुकी है।
भारत भवन में होगा अंतरराष्ट्रीय विमर्श
समागम में फिजी, नेपाल, मैक्सिको, सूरीनाम और त्रिनिदाद एवं टोबैगो समेत 9 देशों के राजदूत और सांस्कृतिक प्रतिनिधि भाग लेंगे। इसके अलावा वैज्ञानिक, पर्यावरणविद्, नीति विशेषज्ञ, कॉर्पोरेट प्रतिनिधि और सांस्कृतिक जगत की हस्तियां भी शामिल होंगी।कार्यक्रम में जल, पृथ्वी, वायु, आकाश और अग्नि जैसे पंचमहाभूतों पर अलग-अलग वैचारिक सत्र आयोजित किए जाएंगे। जल विशेषज्ञ राजेंद्र सिंह सहित कई विशेषज्ञ जल संकट, भूजल संरक्षण और पर्यावरणीय चुनौतियों पर अपने विचार रखेंगे।
फिल्म, लोककला और पर्यावरण चेतना का संगम
हर शाम सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ ‘प्रवाह फिल्म समारोह’ आयोजित किया जाएगा, जिसमें जल संकट और प्रकृति संरक्षण पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का प्रदर्शन होगा। इसके अलावा चित्रकला कार्यशालाएं, प्रदर्शनियां और जल विषयक पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाएगा।
1100 नदियों के अध्ययन पर सरकार का फोकस
आयोजकों के अनुसार, मध्यप्रदेश की लगभग 1100 नदियों का अध्ययन, सैटेलाइट मैपिंग और दस्तावेजीकरण किया गया है। सरकार की योजना शिप्रा परिक्रमा की तर्ज पर प्रदेशभर में नदी संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने की है, ताकि भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल स्रोत सुरक्षित बनाए जा सकें।

