कोलकाता। पश्चिम बंगाल में भाजपा नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में एक चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। इस हाई-प्रोफाइल केस में उत्तर प्रदेश के बलिया निवासी राज सिंह को केवल नाम की समानता के कारण आरोपी समझकर गिरफ्तार कर लिया गया। करीब 10 दिन तक पूछताछ और हिरासत में रखने के बाद सीबीआई को एहसास हुआ कि उन्होंने गलत व्यक्ति को पकड़ लिया है। इसके बाद कोर्ट की अनुमति से राज सिंह को रिहा कर दिया गया।
डर लग रहा था कहीं एनकाउंटर न हो जाए
रिहा होने के बाद बलिया पहुंचे राज सिंह ने मीडिया से बातचीत में अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी के बाद उन्हें लगातार डर सताता रहा कि कहीं उन्हें फर्जी केस में फंसा कर एनकाउंटर न कर दिया जाए। राज सिंह के मुताबिक, वह अयोध्या में भगवान श्रीराम के दर्शन कर वापस लौट रहे थे। तभी स्थानीय एसओजी टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया। बाद में उन्हें कोलकाता पुलिस के हवाले कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना पूरी जांच किए उन्हें अपराधी की तरह पेश किया गया और लगातार दबाव बनाया गया कि वे जुर्म कबूल कर लें।
नाम की गलती ने बदल दी जिंदगी
बता दें पूरे मामले में सबसे बड़ी चूक नाम को लेकर हुई। असली आरोपी का नाम राजकुमार सिंह था, लेकिन पुलिस ने राज सिंह को ही संदिग्ध मान लिया। सीबीआई की लंबी पूछताछ और तकनीकी जांच के बाद यह साफ हुआ कि गिरफ्तार युवक का हत्याकांड से कोई संबंध नहीं है। इसके बाद मुजफ्फरनगर से असली आरोपी राजकुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया, जिसे इस हत्या की साजिश का मुख्य मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।
कोर्ट में मानी गई गलती
जब सीबीआई को वास्तविक स्थिति का पता चला तो एजेंसी ने अदालत में आवेदन देकर कहा कि गलत व्यक्ति गिरफ्तार हो गया था। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए राज सिंह की रिहाई का आदेश दिया। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों के भीतर भी इस गलती को लेकर असहजता रही। मामला अब पुलिस की कार्यप्रणाली और शुरुआती जांच पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
कैसे हुई थी चंद्रनाथ रथ की हत्या?
जानकारी अनुसार, यह सनसनीखेज वारदात पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के मध्यग्राम इलाके में हुई थी। विधानसभा चुनाव परिणाम आने के दो दिन बाद देर रात शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ पर अज्ञात हमलावरों ने फायरिंग कर दी थी। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। इस हत्या ने बंगाल की राजनीति में बड़ा बवाल खड़ा कर दिया था।
वायुसेना से राजनीति तक का सफर
चंद्रनाथ रथ पहले भारतीय वायुसेना में कार्यरत थे। स्वैच्छिक रिटायरमेंट के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट सेक्टर में काम किया और बाद में राजनीति से जुड़े। साल 2019 में जब शुभेंदु अधिकारी ममता बनर्जी सरकार में मंत्री थे, उसी दौरान रथ उनकी टीम का हिस्सा बने। बाद में शुभेंदु अधिकारी के भाजपा में शामिल होने पर रथ का परिवार भी भाजपा के करीब आ गया।
जांच एजेंसियों पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली और गिरफ्तारी प्रक्रिया को लेकर बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर समय रहते गलती सामने नहीं आती तो एक निर्दोष व्यक्ति की जिंदगी पूरी तरह बर्बाद हो सकती थी। अब इस मामले में असली आरोपी से पूछताछ जारी है और सीबीआई हत्या के पीछे की साजिश, राजनीतिक कनेक्शन और फंडिंग एंगल की भी जांच कर रही है।

