भोपाल। मप्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करने की दिशा में सरकार ने जनभागीदारी बढ़ाने की कवायद तेज कर दी है। राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति अब प्रदेश के विभिन्न जिलों में जाकर नागरिकों, सामाजिक संगठनों और अलग-अलग वर्गों से सीधे संवाद कर सुझाव जुटाएगी। साथ ही आम लोग 15 जून 2026 तक ऑनलाइन माध्यम से भी अपनी राय दे सकेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में यूसीसी मध्य प्रदेश की विशेष वेबसाइट का लोकार्पण करते हुए कहा कि इस पहल का उद्देश्य आम नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि वेबसाइट और जिला स्तर पर होने वाले जन संवाद से सुझाव लेने की प्रक्रिया अधिक व्यापक और प्रभावी बनेगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस तरह की व्यवस्था तैयार करने वाले अग्रणी राज्यों में अब मध्य प्रदेश भी शामिल हो गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल के बाद देशभर में समान नागरिक संहिता को लेकर गंभीरता से काम शुरू हुआ है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से ही एक समान व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जाती रही है और अब नागरिक हितों की सुरक्षा तथा पारिवारिक कानूनों के समग्र अध्ययन के लिए यह जरूरी कदम उठाया जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय पर आम जनता, राजनीतिक दलों, गैर-सरकारी संगठनों और सामाजिक समूहों से प्राप्त सुझावों का सम्मानपूर्वक अध्ययन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने ‘एक राष्ट्र, एक विधान, एक निशान और एक विधि’ की भावना को दोहराते हुए कहा कि मध्य प्रदेश इस दिशा में अपने दायित्वों का निर्वहन करेगा।
राज्य सरकार की उच्च स्तरीय समिति विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार समेत पारिवारिक कानूनों से जुड़े सामाजिक, कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन कर अपनी अनुशंसाएं सरकार को सौंपेगी। इसी उद्देश्य से व्यापक जन परामर्श प्रक्रिया शुरू की गई है।
वेबसाइट पर 15 जून तक दे सकेंगे सुझाव
सरकार की ओर से शुरू की गई वेबसाइट के माध्यम से नागरिक अपने सुझाव ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे। सुझाव देने की अंतिम तिथि 15 जून 2026 निर्धारित की गई है। कार्यक्रम में समिति की अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। समिति के सचिव अजय कटेसरिया ने समिति की कार्यप्रणाली और आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी।

