भोपाल। मध्य प्रदेश के जल संसाधन विभाग में लंबे समय से लंबित पदोन्नतियों का असर अब प्रशासनिक व्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। विभाग में मुख्य अभियंता और समकक्ष पदों की कमी को देखते हुए आठ कार्यपालन यंत्रियों और अधीक्षण यंत्रियों को सुपरसीड कर प्रभारी मुख्य अभियंता तथा परियोजना प्रमुख जैसे अहम पदों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विभाग ने आदेश जारी कर इन अधिकारियों को वित्तीय अधिकार भी प्रदान कर दिए हैं।
प्रदेश में करीब एक दशक से नियमित प्रमोशन नहीं होने के कारण जल संसाधन, लोक निर्माण, नगरीय विकास और ग्रामीण अभियांत्रिकी सेवा जैसे विभागों में वरिष्ठ पद खाली पड़े हैं। ऐसे में शासन को जूनियर अधिकारियों को उच्च पदों का प्रभार देकर काम चलाना पड़ रहा है।
हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर विभागीय असंतोष भी बढ़ रहा है और कई मामलों में अधिकारी अदालत की शरण तक पहुंच रहे हैं। इसी बीच जल संसाधन विभाग ने रिक्त मुख्य अभियंता पदों पर नई प्रभारी नियुक्तियां की हैं। इनमें दुर्गा प्रसाद अनुरागी को प्रभारी मुख्य अभियंता बेतवा बोर्ड झांसी बनाया गया है। वे वर्तमान में दतिया कमांड क्षेत्र एवं जल प्रबंधन प्रकोष्ठ में परियोजना प्रशासक के रूप में कार्यरत हैं।
आरआर मीणा को प्रभारी मुख्य अभियंता बोधी भोपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे अभी तक नर्मदापुरम में मुख्य अभियंता कार्यालय और बेतवा पीएमयू भोपाल में परियोजना संचालक का कार्य देख रहे थे। कमलेश कुमार रैकवार को अंतरराज्यीय कार्यालय प्रमुख अभियंता जल संसाधन भोपाल में प्रभारी मुख्य अभियंता पद पर पदस्थ किया गया है। वहीं बीके सिंह को मोहनपुरा-कुंडलिया परियोजना प्रबंधन इकाई राजगढ़ का प्रभारी परियोजना संचालक बनाया गया है।
प्रवीण कुमार खरत को प्रभारी मुख्य अभियंता चंबल-बेतवा कछार भोपाल, विनोद कुमार मंडलोई को प्रभारी मुख्य अभियंता गंगा कछार रीवा और उदय सिंह परते को प्रभारी मुख्य अभियंता बैनगंगा कछार सिवनी की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा अरुण सिंह चौहान को बांध सुरक्षा संगठन भोपाल में प्रभारी मुख्य अभियंता पद पर पदस्थ किया गया है।

