मॉस्को। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत और यूरेशियन इकोनोमिक यूनियन यानी EAEU के बीच व्यापारिक रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है। पुतिन ने कहा है कि रूस भारत के साथ व्यापार समझौतों को और उदार बनाने के लिए लगातार बातचीत कर रहा है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार पहले ही रिकॉर्ड 69 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है और आने वाले समय में इसमें और तेजी देखने को मिल सकती है।
रूस अब पश्चिमी देशों पर निर्भरता घटाने में जुटा
Russia-Ukraine War के बाद रूस लगातार अपने नए व्यापारिक साझेदार तलाश रहा है। अमेरिका और यूरोपीय देशों की आर्थिक पाबंदियों के बीच अब रूस एशियाई बाजारों, खासकर भारत और चीन के साथ संबंध मजबूत करने पर फोकस कर रहा है।
भारत को क्या होगा फायदा?
यदि भारत और EAEU के बीच व्यापार समझौते और आसान होते हैं तो इसका सीधा फायदा भारतीय बाजार और कारोबारियों को मिल सकता है। संभावित फायदे-
- रूस से आयात होने वाले सामान सस्ते हो सकते हैं
- भारतीय निर्यातकों को बड़ा बाजार मिल सकता है
- फार्मा, कृषि, ऑटो और टेक्सटाइल सेक्टर को फायदा मिल सकता है
- तेल और ऊर्जा क्षेत्र में भारत की लागत घट सकती है
- पश्चिमी देशों पर व्यापारिक निर्भरता कम हो सकती है
क्या है EAEU?
यूरेशियन इकोनोमिक यूनियन यानी EAEU एक क्षेत्रीय आर्थिक संगठन है, जिसमें रूस, बेलारूस,कजाखस्तान, आर्मेनिया और किर्गिस्तान जैसे देश शामिल हैं। इस संगठन का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच व्यापार आसान बनाना, साझा बाजार तैयार करना, पूंजी और श्रम का मुक्त प्रवाह बढ़ाना है।
राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहा व्यापार
पुतिन ने कहा कि EAEU देशों के बीच ज्यादातर व्यापार अब राष्ट्रीय मुद्राओं में किया जा रहा है। यानी डॉलर और यूरो पर निर्भरता धीरे-धीरे कम की जा रही है। उन्होंने कहा स्थानीय करेंसी में लेनदेन से वैश्विक संकट का असर कम पड़ता है। बाहरी दबावों से व्यापार ज्यादा सुरक्षित रहता है। सदस्य देशों के बीच आर्थिक स्थिरता मजबूत होती है।
रूस और भारत के बीच पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा व्यापार, रक्षा समझौते, कच्चे तेल की खरीद, फार्मास्यूटिकल और टेक्नोलॉजी सेक्टर में तेजी से सहयोग बढ़ा है।
ग्लोबल राजनीति में बदल रहा आर्थिक समीकरण
पुतिन के बयान को सिर्फ व्यापार नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति के नजरिए से भी अहम माना जा रहा है। अमेरिका और यूरोप से बढ़ते तनाव के बीच रूस अब एशियाई देशों के साथ मजबूत आर्थिक ब्लॉक तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है। भारत के लिए भी यह मौका सस्ती ऊर्जा, नए निर्यात बाजार और वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत भूमिका दिलाने वाला साबित हो सकता है।

