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एनएचएम संविदा कर्मचारियों के टीडीएस पर करोड़ों का खेल? बालाघाट स्वास्थ्य विभाग में वित्तीय गड़बड़ी से मचा हड़कंप

कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई आयकर विभाग तक नहीं पहुंची, सवालों के घेरे में जिम्मेदार अधिकारी और पूरा वित्तीय तंत्र

बालाघाट। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत कार्यरत संविदा कर्मचारियों के वेतन से हर माह काटे जाने वाले टीडीएस को लेकर बालाघाट स्वास्थ्य विभाग में गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि कर्मचारियों के वेतन से काटी गई आयकर राशि को नियमानुसार आयकर विभाग के खाते में जमा करने के बजाय किसी अन्य खाते में जमा कर दिया गया। इस खुलासे के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

मामला तब उजागर हुआ जब वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद कुछ कर्मचारियों ने आयकर रिटर्न दाखिल कर अपना टीडीएस क्लेम करने की प्रक्रिया शुरू की। जांच के दौरान उन्हें पता चला कि उनके वेतन से काटी गई कर राशि आयकर विभाग के रिकॉर्ड में जमा ही नहीं दिखाई दे रही है। इससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है और वे अपनी मेहनत की कमाई के हिसाब की मांग कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, बालाघाट जिले में एनएचएम के तहत विभिन्न पदों पर लगभग 800 कर्मचारी एवं अधिकारी कार्यरत हैं। यदि सभी कर्मचारियों के वेतन से नियमित रूप से टीडीएस काटा गया है, तो प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक यह वित्तीय गड़बड़ी दो करोड़ रुपये से अधिक की हो सकती है। हालांकि वास्तविक राशि विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

लापरवाही, तकनीकी चूक या सुनियोजित खेल?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कर्मचारियों के वेतन से काटा गया पैसा गया कहां? क्या यह महज प्रशासनिक लापरवाही का मामला है, या फिर करोड़ों रुपये की राशि को लेकर कोई बड़ा वित्तीय खेल खेला गया है? वित्तीय प्रक्रियाओं में वेतन तैयार करने वाले अकाउंटेंट की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, लेकिन अंतिम स्वीकृति और हस्ताक्षर संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से ही होते हैं। ऐसे में सवाल केवल एक कर्मचारी या अकाउंटेंट तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि पूरे वित्तीय नियंत्रण तंत्र की जवाबदेही तय करना आवश्यक हो जाता है।

जिम्मेदार कौन, जवाब देगा कौन?

क्या वेतन से टीडीएस काटने के बाद उसे सही खाते में जमा नहीं करने के लिए लेखा शाखा जिम्मेदार है? या फिर जिले के स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारी, जिनकी अनुमति और हस्ताक्षर के बिना कोई वित्तीय भुगतान संभव नहीं माना जाता? कर्मचारियों का कहना है कि जब उनकी तनख्वाह से राशि नियमित रूप से काटी गई, तो उसका हिसाब भी विभाग को सार्वजनिक करना चाहिए।

कर्मचारियों का पैसा कहां गया?

अब सबसे अहम प्रश्न यही है कि एनएचएम संविदा कर्मचारियों की जेब से काटी गई करोड़ों रुपये की राशि आखिर किस खाते में पहुंची? यदि यह धनराशि आयकर विभाग तक नहीं पहुंची, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है? और क्या इस पूरे मामले में वित्तीय अनियमितता या गबन की आशंका से इनकार किया जा सकता है? बालाघाट स्वास्थ्य विभाग की इस कथित गड़बड़ी ने कर्मचारियों के बीच अविश्वास पैदा कर दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग इस मामले में क्या सफाई देता है और जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।

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