मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर में हुए दर्दनाक अस्पताल अग्निकांड ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। प्रसाद हॉस्पिटल की आईसीयू यूनिट में लगी भीषण आग में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे के बाद प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू करते हुए एफआईआर दर्ज की है, जबकि अस्पताल के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
शॉर्ट सर्किट से भड़की आग
जानकारी के अनुसार, ब्रह्मपुरा क्षेत्र स्थित प्रसाद हॉस्पिटल की पांचवीं मंजिल पर बने आईसीयू में गुरुवार को अचानक आग लग गई। प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। हादसे के समय आईसीयू में 20 से 25 मरीज भर्ती थे। आग तेजी से फैलने के कारण मरीजों और परिजनों में अफरा-तफरी मच गई। अस्पताल कर्मियों और स्थानीय लोगों की मदद से कई मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, लेकिन कुछ मरीज आग और धुएं की चपेट में आ गए।
मृतकों का आंकड़ा पहुंचा 6
हादसे में गंभीर रूप से झुलसे बृजनंदन राय को बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया था। हालांकि उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके साथ ही इस अग्निकांड में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 6 हो गई है। प्रशासन ने सभी मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है।
अस्पताल प्रबंधन पर FIR
घटना के बाद तिरहुत रेंज के कमिश्नर गिरबर दयाल के निर्देश पर जांच शुरू की गई। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल में अग्नि सुरक्षा मानकों, आपातकालीन निकासी व्यवस्था और अन्य सुरक्षा प्रबंधों की भी जांच की जा रही है। यदि लापरवाही के और तथ्य सामने आते हैं तो कार्रवाई का दायरा बढ़ाया जाएगा।
तीन कर्मचारी गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में अस्पताल के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक पूछताछ के बाद तीनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि हादसे से जुड़े हर पहलू की जांच की जा रही है और दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।
मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपये की सहायता
अनुमंडल पदाधिकारी (पूर्वी) तुषार कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह सहायता राशि प्रदान की जा रही है। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है।
इस हादसे ने एक बार फिर निजी अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में नियमित फायर ऑडिट, आपातकालीन निकासी योजना और सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
फिलहाल प्रशासनिक जांच जारी है और आने वाले दिनों में हादसे से जुड़े कई महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

