भीषण गर्मी में जल स्रोतों के किनारे धधक रहे ईंट भट्टे
बालाघाट। जिले में इन दिनों एक ऐसा मामला चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर बैहर तहसील में नियमों के उल्लंघन को लेकर ईंट भट्टों पर कार्रवाई की जाती है। वहीं दूसरी ओर किरनापुर तहसील में कथित रूप से नदी-नालों, तालाबों और राजस्व भूमि के आसपास संचालित हो रहे भट्टों पर अब तक किसी बड़ी कार्रवाई के सामने न आने से लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि भीषण गर्मी के इस दौर में जब जल संरक्षण को लेकर शासन-प्रशासन लगातार अभियान चला रहा है, कुछ स्थानों पर जल स्रोतों के आसपास ईंट निर्माण गतिविधियां जारी रहने की शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि भट्टों के लिए मिट्टी की व्यवस्था करने राजस्व भूमि तक को नहीं छोड़ा जा रहा और जेसीबी मशीनों के माध्यम से बड़े पैमाने पर उत्खनन किया जा रहा है।
बैहर में सख्ती, किरनापुर में नरमी क्यों?
जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि बैहर तहसील में नियमों के पालन को लेकर प्रशासन सक्रिय हो सकता है, तो किरनापुर में ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दे रही? आखिर एक ही जिले में अलग-अलग मापदंड क्यों अपनाए जा रहे हैं? ग्रामीणों का आरोप है कि कई स्थानों पर वर्षों से भट्टों का संचालन हो रहा है और संबंधित विभागों को इसकी जानकारी भी है। इसके बावजूद यदि कार्रवाई नहीं हो रही तो यह स्थिति संदेह पैदा करती है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखनी चाहिए।
जल संकट के बीच पर्यावरण पर खतरे की आशंका
भीषण गर्मी के कारण जिले के कई हिस्सों में जल स्तर लगातार घट रहा है। तालाब सिकुड़ रहे हैं, नाले सूख रहे हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या बढ़ती जा रही है। ऐसे समय यदि जल स्रोतों के आसपास मिट्टी उत्खनन या अन्य गतिविधियां होती हैं तो इसका असर पर्यावरण और भू-जल स्तर पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जल स्रोतों के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने के लिए नियमों का सख्ती से पालन आवश्यक है। यदि कहीं भी नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो उस पर त्वरित कार्रवाई होना चाहिए।
राजस्व विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में
स्थानीय लोगों का दावा है कि कई गतिविधियां खुलेआम संचालित हो रही हैं और क्षेत्रीय अमले की नजरों से छिपी नहीं हो सकतीं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या संबंधित विभागों द्वारा नियमित निरीक्षण किया जा रहा है? यदि निरीक्षण हो रहा है तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? ग्रामीणों का कहना है कि यदि शिकायतें निराधार हैं तो प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि शिकायतें सही हैं तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कदम उठाए जाने चाहिए।
जनता की मांग – निष्पक्ष जांच हो, सच्चाई सामने आए
क्षेत्र के नागरिक अब पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए। चाहे के एसडीएम ने किये हो या किरनापुर, नियमों का पालन हर जगह एक समान होना चाहिए। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जांच करता है या नहीं। यदि जांच होती है तो कई बड़े खुलासे सामने आने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

